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पठानकोट में नदी पार करते समय अचानक नाव में घुसा पानी, लोगों की अटकीं सांसें; मच गई चीख-पुकार

Published: Mon, 13 Jul 2026 04:57 PM (IST)Updated: Mon, 13 Jul 2026 04:59 PM (IST)

पठानकोट में रावी और उज दरिया के संगम पर एक नाव में अचानक पानी भर जाने से सवार लोग दहशत ...और पढ़ें

पठानकोट में रावी-उज दरिया में नाव में भरा पानी। फोटो जागरण

पठानकोट में रावी-उज दरिया में नाव में भरा पानी। फोटो जागरण

HighLights

  1. मकौड़ा पतन पर चलती नाव में अचानक पानी भरने से दहशत।

  2. किनारे के नजदीक होने से सभी सवार लोग सुरक्षित बचाए गए।

  3. बरसात में सात गांवों के लिए स्थायी पुल की कमी उजागर।

जागरण संवाददाता, पठानकोट। रावी और उज दरिया के संगम स्थल मकौड़ा पतन पर चलती नाव में अचानक पानी भरने से नाव बीच दरिया के हिचकोले खाने लगी, जिससे सवार लोग दहशत में आ गए। नाव में सवार लोगों की ओर से चीख पुकार शुरू हो गई। जिसे सुन कर नजदीक खड़े लोगों तुरंत पानी में जाकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

गनीमत यह रही की जिस समय यह घटना घटित हुई दरिया का बहाव तेज नहीं था और नाव किनारे के नजदीक पहुंच चुकी थी, जिससे वहां किनारे के नजदीक खड़े लोगों की ओर से बिना देरी किए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना के वक्त नाव में महिलाएं और बच्चे भी सवार थे। दरिया का बहाव तेज होता तो बढ़ी घटना घटित हो सकती थी। बताया जा रहा है कि नाव में सुराख के कारण पानी भर जाता है। इस घटना के बाद लोग दरिया से पैदल ही आते दिखाई दिए।

नदी के पार सात गांव

बता दें कि यहां नदी के पार सात गांव हैं, इनमें से तीन गांव पठानकोट जिले में पड़ते हैं। यह सभी गांव नदी के पार भारत पर सीमा से सटे हुए हैं, यहां हर बरसात के मौसम में लोगों को ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ता है। यहां लोगों की सुविधा लिए दरिया पर अस्थाई पुल का निर्माण करवाया गया है, लेकिन बरसात के दिनों में उठा लिया जाता है। ॉ

इसके बाद लोगों की आवाजाही यहां दरिया में चलने वाली नाव पर ही निर्भर हो जाती है। नाव में पानी भर की घटना कहीं न कहीं संकेत दे रही शायद यहां प्रशासनिक व्यवस्था में सुराख़ है। ग्रामीण मोहकम सिंह, रवि कुमार , गुलशन कुमार ने बताया कि हर बरसात में इन गांव का संपर्क शेष भारत से कट जाता है और हर साल ऐसे ही हालातो का सामना करना पड़ा।

नेताओं से उठ रहे लोगों का विश्वास

लोगों को करना पड़ता है ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी का बहाव तेज होता तो जानी नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता ग्रामीणों ने जहां तक कहा कि किसी भी सरकार की ओर से यहां लोगों की समस्या का समाधान अभी तक नहीं किया लोगों का विश्वास नेताओं पर से उठता जा रहा क्योंकि लोग वर्षों से हर बरसात में ऐसे ही दंश झेल रहे हैं।

उधर मौके पर मौजूद शिक्षा विभाग से संबंधित कर्मचारी विक्रम सिंह ने बताया कि उनकी ड्यूटी, एसआईआर के तहत यहां नदी पार बूथ नंबर 1 पर लगी हुई है नाव में पानी भर जाने की घटना के बाद उन्हें करीब 1 घंटे के इंतजार के बाद जाना पड़ा है।

बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से यहां पक्के पुल के निर्माण की मंजूरी दी जा चुकी है और उसके लिए करीब 100 करोड़ रुपये अभी मंजूर हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर अभी पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है और लोग आज भी दरिया का दंश झेल रहे हैं।

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