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    घर से रूठकर निकला, पटियाला में जानवरों की तरह जंजीरों में कटा जीवन; 23 साल बाद तमिलनाडु के प्रकाश का मां से हुआ मिलन

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:21 PM (GMT+05:30)

    पटियाला में 23 साल बाद एक मां-बेटे का भावुक मिलन हुआ, जहां 68 वर्षीय आर. सुंदरी ने अपने बेटे प्रकाश को गले लगाया, जिसे 16 साल की उम्र में घर छोड़ने के ...और पढ़ें

    23 साल बाद अपने बेटे प्रकाश को देखकर भावुक होती मां आर. सुंदरी।

    23 साल बाद अपने बेटे प्रकाश को देखकर भावुक होती मां आर. सुंदरी।

    HighLights

    1. पटियाला में 23 साल बाद मां-बेटे का हुआ भावुक मिलन

    2. प्रकाश को 20 साल तक बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया था

    3. सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से बेटे को मिली आजादी

    गौरव सूद, पटियाला। 23 वर्षों तक बेटे के इंतजार में आंखें बिछाए बैठी एक मां की उम्मीद आखिरकार सच साबित हुई। पटियाला जिले के गांव लचकाणी स्थित अपना फर्ज सेवा सोसायटी में वीरवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

    तमिलनाडु की रहने वाली 68 वर्षीय आर. सुंदरी ने जब 23 साल बाद (अब 39 वर्ष का) अपने बेटे प्रकाश को सीने से लगाया तो मां-बेटे की आंखों से आंसुओं की धारा बह उठी। परिवार से बिछड़ने की कहानी वर्ष 2003 की है।

    तमिलनाडु के पूमलाई पट्टी गांव का प्रकाश 16 वर्ष की उम्र में अपने छोटे भाई के साथ स्कूटर चलाने को लेकर हुए विवाद के बाद गुस्से में घर से चला गया था। परिवार ने उसे हरसंभव जगह तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

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    23 साल बाद अपने बेटे प्रकाश को देखकर भावुक होती मां आर. सुंदरी। जागरण

    परिवार ने यह मान लिया कि शायद उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन प्रकाश की मां आर. सुंदरी ने बेटे के लौटने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। हर त्योहार, हर जन्मतिथि और हर प्रार्थना में वह बेटे की सलामती की दुआ मांगती रहीं। वर्ष 2021 में कैंसर से प्रकाश के पिता की मौत हो गई।

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    डिप्टी कमिश्नर हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रकाश को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है। उन्होंने श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि जिन लोगों ने उसे वर्षों तक बंधुआ बनाकर रखा, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए।

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    अमृतसर के एक गांव में जंजीरों से बंधे प्रकाश के साथ एनजीओ प्रमुख भाई पाल सिंह खरौड़। सौ. सोसायटी

    अपना फर्ज सेवा सोसायटी के अनुसार, प्रकाश अमृतसर जिले की अजनाला तहसील के गांव जसराऊर पहुंच गया, जहां उसे किसी जमींदार ने लगभग 20 वर्ष तक बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया। उससे डेयरी फार्म पर बिना वेतन के काम कराया जाता था। विरोध करने पर उसे जंजीरों से बांध दिया जाता और रात को कमरे में बंद रखा जाता था।

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    परिवार को प्रकाश सौंपने मौके डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल एवं अन्य। जागरण

    साल 2022 में सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उसे मुक्त करवाकर पटियाला के शेल्टर होम में रखा गया। शुरुआत में प्रकाश मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर था। धीरे-धीरे उसने अपने गांव का नाम पूमलाईपट्टी बताना शुरू किया। यही नाम उसकी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।