पंजाब में बिजली संकट गहराया, 1500MW घटा उत्पादन; कोयले की कमी से आधी क्षमता पर चल रहे बड़े थर्मल पावर प्लांट
कोयले की कमी से पंजाब में बिजली उत्पादन 1500 मेगावाट घटा है। बड़े ताप बिजलीघर आधी क्षमता पर चल रहे हैं, जिससे घरेलू और औद्योगिक बिजली कटौती बढ़ी है।

बठिंडा थर्मल प्लांट की पुरानी तस्वीर।
HighLights
पंजाब में बिजली उत्पादन 1500 मेगावाट कम हुआ।
कोयले की कमी से थर्मल प्लांट आधी क्षमता पर।
बिजली मंत्री ने केंद्र से तत्काल समाधान की मांग की।
डिजिटल डेस्क, पटियाला। पंजाब में बिजली संकट गहराता जा रहा है। राज्य में बिजली उत्पादन करीब 1500 मेगावाट कम हो गया है। पिछले दो-तीन दिनों से बिजली की कमी के कारण घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूरी में बिजली कटौती करनी पड़ रही है। पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने शनिवार को इसके लिए देशभर में पैदा हुए कोयले के गंभीर संकट को प्रमुख कारण बताया।
बिजली मंत्री ने कहा कि कोयले की कमी केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। देशभर में करीब 63 हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। कई थर्मल प्लांट्स (ताप बिजलीघरों) में सिर्फ तीन से चार दिन का कोयला भंडार बचा है। इसके चलते उन्हें अपनी क्षमता के करीब आधे हिस्से पर चलाना पड़ रहा है।
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आधी क्षमता पर चल रहे बिजली घर
सौंद के अनुसार, पंजाब के निजी ताप बिजलीघरों पर भी कोयले की कमी का असर पड़ा है। ये बिजलीघर भी करीब आधी क्षमता पर चल रहे हैं। इससे राज्य में उपलब्ध बिजली की मात्रा और कम हो गई है।
उन्होंने बताया कि जिन ताप बिजलीघरों को पंजाब सरकार की ओर से कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है, वहां करीब 10 दिन का भंडार मौजूद है। राज्य सरकार के प्रयासों के कारण इन बिजलीघरों में स्थिति फिलहाल बेहतर है।
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बिजलीघरों को पूरा कोयला उपलब्ध नहीं
बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड ताप बिजलीघर, राजपुरा और तलवंडी साबो ताप बिजलीघर, मानसा को केंद्र सरकार की ओर से कोयला उपलब्ध कराया जाता है। इन दोनों बड़े बिजलीघरों को पूरी मात्रा में कोयला नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप दोनों बिजलीघर करीब आधी क्षमता पर चल रहे हैं और इसका सीधा असर पंजाब की बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है।
सौंद ने केंद्र सरकार से कोयले की कमी दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश से जुड़ा गंभीर मामला है। केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि कोयले की कमी कब तक दूर होगी, ताकि आम लोगों और उद्योगों को बिना बाधा बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
(इनपुट- पीटीआई)
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