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पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई न होने पर युवक ने खाया जहर, प्रदेश में मचा सियासी बवाल

Published: Mon, 21 Sep 2026 05:52 AM (IST)

पंजाब के संगरूर में एक व्यक्ति ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई न होने पर डीसी दफ्तर के बाहर जहरीला पदार्थ ...और पढ़ें

HighLights

  1. संगरूर में ड्रग्स कार्रवाई न होने पर युवक ने खाया जहर।

  2. जगसीर ने ड्रग्स बिक्री पर प्रशासन की निष्क्रियता का आरोप लगाया।

  3. विपक्ष ने पंजाब सरकार पर ड्रग्स संकट को लेकर साधा निशाना।

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब के संगरूर जिले में डिप्टी कमिश्नर (DC) के दफ्तर के बाहर एक व्यक्ति द्वारा जहरीला पदार्थ खा लेने के बाद नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। व्यक्ति का आरोप है कि अधिकारी उसके गांव में ड्रग्स की कथित बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं।

जगसीर सिंह उर्फ जग्गा को संगरूर सरकारी अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर कर दिया गया। जगसीर ने आरोप लगाया कि उसके गांव 'नमोल' में ड्रग्स बेचे जा रहे थे और सरपंच व प्रशासन को इस बारे में कई बार बताया गया, लेकिन कोई असरदार कार्रवाई नहीं हुई।

उसके दोस्त मंजिंदर सिंह, जो DC दफ्तर जाने में उसके साथ था, ने आरोप लगाया कि जगसीर ने पहले कुछ लोगों को 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग) बेचते हुए दिखाते हुए वीडियो बनाए थे और बाद में उस पर हमला भी हुआ था। मंजिंदर का दावा है कि इस कथित घटना के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसने बताया कि जगसीर ने उसे कहा था कि उसने 'सल्फास' खा लिया है।

हालांकि, डॉक्टरों ने खाए गए पदार्थ के बारे में अलग जानकारी दी। डॉ. इकबालप्रीत सिंह ने कहा कि मरीज़ ने ज़हरीला पदार्थ खाया था, उसे प्राथमिक उपचार दिया गया और आगे के इलाज के लिए पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टर के अनुसार, उस पदार्थ की पहचान "फार्नेल" (Farnel) के तौर पर हुई है।

संगरूर सिटी स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) मनप्रीत सिंह भी मौके पर पहुंचे लेकिन टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि युवक का इलाज चल रहा है और इलाज के बाद ही आगे की जानकारी दी जा सकेगी।

इस घटना ने अब सियासी टकराव को जन्म दे दिया है। कांग्रेस और BJP नेता ड्रग्स की समस्या और ड्रग्स के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि यह घटना पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों को झेलने पड़ रहे "दबाव और दुर्व्यवहार" को दिखाती है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ वीडियो पोस्ट करने के बाद जग्गा को धमकियाँ मिली थीं और उसे परेशान किया गया था। उन्होंने AAP सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए।

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी पंजाब सरकार पर निशाना साधा और कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह ज़िले संगरूर में एक और व्यक्ति ने आत्महत्या की कोशिश की है।

बाजवा ने आरोप लगाया कि ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने के कारण जग्गा को धमकाया गया और उस पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि जग्गा पुलिस के पास भी गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार के "नशा-मुक्त पंजाब" के दावों पर सवाल उठाए और पूछा कि ड्रग्स की समस्या और इसका विरोध करने वालों की सुरक्षा को गंभीरता से लेने के लिए अधिकारियों को और कितनी घटनाओं का इंतजार है।

बीजेपी नेता परमिंदर बरार ने भी संगरूर में गुलजार सिंह और मोहनजीत सिंह से जुड़ी हालिया घटनाओं को जग्गा सिंह मामले से जोड़ते हुए AAP सरकार पर निशाना साधा।

बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सवाल किया कि क्या ड्रग माफिया को कथित संरक्षण और ड्रग्स के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को कथित तौर पर परेशान करना पंजाब की जमीनी हकीकत को दिखाता है।

मोहनजीत सिंह, गुलज़ार सिंह और अब जगसीर सिंह का ज़िक्र करते हुए बिट्टू ने आरोप लगाया कि सरकार ड्रग बेचने वालों का साथ दे रही है और ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।

बिट्टू ने यह भी आरोप लगाया कि ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, आम नागरिक, गांव के प्रतिनिधि और ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग धमकियों और कथित झूठे मामलों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने सरकार के "नशा-मुक्त पंजाब" के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री के गृह ज़िले में भी नशा-विरोधी कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं हैं, तो ड्रग्स की समस्या से निपटने के प्रशासन के तरीके पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बिट्टू ने कहा कि डर या धमकियों से लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती और उन्होंने जगसीर सिंह और ड्रग्स के खिलाफ लड़ने वाले अन्य लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की।

इस ताजा घटना ने पंजाब के ड्रग संकट पर चल रही राजनीतिक लड़ाई में एक नया मोड़ ला दिया है, जिसमें विपक्षी नेता समस्या से निपटने के सरकार के दावों और ज़मीनी स्तर पर शिकायतों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

जगसीर सिंह के मामले में ड्रग्स की बिक्री, मारपीट, धमकियों, झूठे मामलों और पुलिस की निष्क्रियता के आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उम्मीद है कि पुलिस जांच और मेडिकल रिकॉर्ड से घटनाक्रम और घटना से जुड़ी परिस्थितियों का पता चल सकेगा।