रोजाना तीन हजार करवाते हैं इलाज, आज न दवा ना ही टेस्ट; संगरूर में आम आदमी क्लीनिक की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप
संगरूर में आम आदमी क्लीनिक के डॉक्टर, फार्मासिस्ट और असिस्टेंट ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे जिले के 55 क्लीनिकों में स्वास्थ्य सेवाएं ...और पढ़ें
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संगरूर में आम आदमी क्लीनिक की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप। फोटो जागरण
HighLights
संगरूर में 55 आम आदमी क्लीनिकों पर हड़ताल।
डॉक्टर, फार्मासिस्ट, असिस्टेंट नियमितीकरण की मांग पर अड़े।
हजारों मरीज बिना इलाज वापस लौटे, ओपीडी ठप।
जागरण संवाददाता, संगरूर। आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट के नेतृत्व में मेडिकल अफसर (डाक्टर), फार्मासिस्ट व क्लीनिक असिस्टेंट द्वारा सोमवार से अनिश्चितकालीन समय के लिए हड़ताल करके संघर्ष का बिगुल बजा दिया गया है, जिससे जिले के 55 के करीब संचालित आम आदमी क्लीनिक पर सेहत सेवाएं ठप हो गई हैं।
आम लोगों को घरों के समीप मुफ्त में मिलने वाली सेहत सेवाएं अनिश्चितकालीन समय के लिए बंद हो गई है। 55 क्लीनिक के करीब 165 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से 3000-3500 रोजाना ओपीडी के लिए आने वाले मरीजों को सोमवार को बिना दवा व चैकअप के वापस लौटना पड़ा।
लोग सुबह से ही आम आदमी क्लीनिक पर दवा इत्यादि लेने के लिए पहुंचे, लेकिन क्लीनिक पर मौजूद हैल्पर हड़ताल होने के कारण सभी मरीजों को वापस भेजते दिखाई दिए। उधर, आम आदमी क्लीनिकों में सेवा निभा रहे मेडिकल अफसर (डाक्टर), फार्मासिस्ट व क्लीनिक असिस्टेंट ने सिविल सर्जन दफ्तर के पार्किंग स्थल में 8 से 2 बजे तक धरना लगाकर एलान किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
धरने दौरान डा. इंद्रजीत सिंगला, डा. दिलबाग सिंह, फार्मासिस्ट विशाल कुमार घराचों, क्लीनिक असिस्टेंट जसवीर कौर ने कहा कि जिले में 55 आम आदमी क्लीनिक लोगों को सेहत सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। आज सात नए क्लीनिक स्थापित किए गए है।
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कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सबसे पहले इंपैनलमेंट व्यवस्था समाप्त कर सभी मेडिकल आफिसर, फार्मासिस्ट व क्लीनिक असिस्टेंट को पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधीन नियमित किया जाए। साथ ही मेडिकल आफिसर को 80 प्रति मरीज, फार्मासिस्ट को 30 प्रति मरीज व क्लीनिक असिस्टेंट को 25 प्रति मरीज राशि दी जाएं, जबकि अभी यह राशि क्रमवार 50, 12, 11 रुपये है।
क्लीनिकों में कार्यरत क्लीनिक असिस्टेंट की शैक्षणिक योग्यता एएनएम है, इसलिए उन्हें एएनएम का पद व दर्जा प्रदान किया जाए। भविष्य में निकलने वाली सरकारी भर्तियों में आम आदमी क्लीनिकों में कार्यरत मेडिकल ऑफिसर, फार्मासिस्ट और क्लीनिक असिस्टेंट को उनकी सेवाओं का अनुभव अंक दिया जाए व आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी प्रदान की जाए। हर वर्ष 15 कैजुअल लीव (सीएल) और मेडिकल लीव की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है।
उन्होंने कहा कि उच्च योग्यता प्राप्त होने के मद्देनजर उनकी भर्ती प्रक्रिया रेगुलर कर्मचारियों की भांति ही की गई है, लेकिन उन्हें इनपैनल नीति के तहत रखा गया है। अभी तक उन्हें कोई मेडिकल, इमरजेंसी व अरनड लीव नहीं मिल रही है।
साढ़े चार वर्षों से वह सेवाएं निभा रहे हैं। कई बार हलका विधायकों, अधिकारियों व सेहत मंत्री से बैठक के बावजूद उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया है। जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
हड़ताल से मरीज परेशान
हड़ताल दौरान जिला लाइब्रेरी परिसर के क्लीनिक पर पहुंचे मरीज मोहम्मद अली, प्रीतम कुमार, राजिंदर कौर, जोगिंदर सिंह, रोहताश कुमार ने कहा कि वह दवा लेने के लिए आए थे, लेकिन यहां आने पर हड़ताल का पता चला।
उन्होंने कहा कि दवा चल रही है इसलिए किसी अन्य जगह पर जाकर भी दवा प्राप्त नहीं की जा सकती। सिविल अस्पताल में उन्हें भीड़ के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय की बर्बादी होती है, जबकि घर के समीप मौजूद आम आदमी क्लीनिक उनके लिए मददगार है।
इसी प्रकार अन्य मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं आम आदमी क्लीनिकों की हड़ताल कारण सिविल अस्पतालों में मरीजों की ओपीडी अधिक रही।