यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Rajasthan: बीएसएफ का फीमेल ऊंट सवार दस्ता तैयार, सीमा क्षेत्रों में होगी तैनाती
Rajasthan राजस्थान के सीमा क्षेत्रों में अब पुरुषों की तरह सीमा सुरक्षा में बीएसएफ का फीमेल ऊंट सवार दस्ता भी तैनात किया जाएगा। सीमा सुरक्षा बल ने लगभ ...और पढ़ें

जयपुर, एजेंसी। Rajasthan News: राजस्थान (Rajasthan) के सीमा क्षेत्रों में अब पुरुषों की तरह सीमा सुरक्षा में बीएसएफ (BSF) का फीमेल ऊंट सवार दस्ता भी तैनात किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।

20 महिला जवान प्रशिक्षित
समाचार एजेंसी आइएएनएस के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने लगभग 20 महिला जवानों को इसके लिए प्रशिक्षित कर लिया है। बीएसएफ की तरफ से ये जानकारी दी गई है।
भीषण गर्मी से बचाव के लिए मुहैया कराई जाती है ठंडी जैकेट
गौरतलब है कि राजस्थान सीमा पर भीषण गर्मी में बचाव के लिए जवानों के पास सिर्फ नींबू, पानी, प्याज और छाछ का ही सहारा रहता है। भीषण गर्मी के दौरान नींबू व पानी और प्याज नियमित रूप से जवानों को बीएसएफ द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है। वहीं, छाछ आसपास के ग्रामीण जवानों तक पहुंचाते हैं। बीएसएफ की ओर से लू से बचाव के लिए ठंडी जैकेट भी उपलब्ध करवाई जाती है। यह जैकेट सूती कपड़े की बनी होती है, जिसमें प्याज, नींबू और अन्य सामान रखने की सुविधा होती है।
भीषण गर्मी में भी सीमा पर रहती है मुस्तैदी
बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में भीषण गर्मी में दोपहर 12 से शाम पांच बजे तक कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकलता है। भीषण गर्मी के दौरान रेत के धोरों के बीच लू के कारण दूर-दूर तक कोई भी नजर नहीं आता, वहां बीएसएफ के जवान चौकसी करते नजर आते हैं। लू से बचाव के लिए मुंह पर कपड़ा बांधे जवान पांच लीटर पानी की बोतल लटका कर अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करते हैं। इस दौरान जवानों को छह-छह घंटे की शिफ्ट में तैनात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी के निकट जवान ऊंट पर पेट्रोलिंग करने के साथ ही पैदल भी दुश्मन पर नजर रखते हैं। भीषण गमी का लाभ उठाकर कोई घुसपैठिया भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं कर जाए, इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। धूलभरी आंधियों के बीच ओपी टावर पर खड़े जवान दिनभर दूरबीन से निगरानी करते हैं। अधिकारी डेजर्ट स्कूटर से लगातार जवानों के पास पहुंचकर उनका हौसला बढ़ाते रहते हैं।