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राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार का फैक्टर, क्या है 2028 की चुनौती?

By Narendra SharmaEdited By: Narender Sanwariya
Published: Mon, 14 Sep 2026 10:47 PM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 12:16 AM (IST)

Rajasthan Election Results: राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक वार्ड जीते और राज्य के चार ...और पढ़ें

Rajasthan Election Results

Rajasthan Election Results

HighLights

  1. राजस्थान में निकाय चुनाव में भाजपा आगे, कांगेस पिछड़ी, निर्दलीयों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण

  2. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृहनगर भरतपुर में बड़ी संख्या में जीते निर्दलीय

  3. वसुंधरा के राजनीतिक कार्यक्षेत्र में भाजपा को झटका, कांग्रेस को मिला बहुमत

नरेंद्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों (Rajasthan Election Results) में सोमवार को सत्ताधारी भाजपा कांग्रेस से आगे निकल गई, उसने विपक्षी पार्टी के 3,613 वार्ड के मुकाबले 4,179 वार्ड जीते और राज्य के 10 नगर निगम में से चार में साफ बहुमत हासिल किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिला मुख्यालय भरतपुर नगर निगम में बहुत चौंकाने वाला नतीजा आया है। यहां भाजपा को बहुमत नहीं मिला है।

भाजपा ने 20 और कांग्रेस ने सात सीट पर जीत दर्ज की

यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने 65 में से 36 सीट जीते, जबकि भाजपा ने 20 और कांग्रेस ने सात सीट पर जीत दर्ज की। हालांकि, सीएम के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में भाजपा को बड़ी जीत मिली है। कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल किया और झालावाड़ में नगर परिषद में बड़ी जीत हासिल की, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता है।

पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई

सोमवार को प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,244 वार्डों में गिनती हो रही थी। इनमें से 10,235 के नतीजे रात साढ़े आठ बजे तक घोषित कर दिए गए थे। भाजपा के 4,179 और कांग्रेस के 3,613 वार्ड के अलावा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने 63, आम आदमी पार्टी ने 42, सीपीआई (एम) ने 38, बीएसपी ने 19 और भारत आदिवासी पार्टी ने आठ वार्ड जीते हैं। वार्ड पार्षदों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के रणनीतिकार अधिक से अधिक निकायों में अपने महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष बनाने में जुटे हैं। पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई है।

भाजपा, वसुंधरा एवं दुष्यंत को गहरा धक्का लगा

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक कार्यक्षेत्र एवं उनके पुत्र दुष्यंत सिंह के निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ में कांग्रेस को बहुमत मिला है। हालांकि, वसुंधरा के विधानसभा क्षेत्र झालारापाटन में भाजपा को बहुमत मिला है। झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में शामिल बारां नगर परिषद में आश्चर्यजनक रूप से आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला है। बारां के चुनाव परिणाम से भाजपा, वसुंधरा एवं दुष्यंत को गहरा धक्का लगा है।

भाजपा को एक समान 44-44 सीटें मिली

केंद्रीय विधिमंत्री अर्जुनराम मेघवाल के निर्वाचन क्षेत्र बीकानेर में भाजपा को झटका लगा है। यहां कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला है। यहां कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीते, जबकि बीजेपी ने 27 वार्ड जीते। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के गृहक्षेत्र जोधपुर में कांग्रेस और भाजपा को एक समान 44-44 सीटें मिली है।

ऐसे में यहां एक आरएलपी और 11 निर्दलीयों को अपने-अपने पक्ष में करने में दोनों ही पार्टियों के नेता जुटे हैं। अजमेर में कांग्रेस 80 में से 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। यहां बीजेपी को 32 और निर्दलीय को 11 वार्ड मिले। यहां किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। अब सभी निकायों में महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों के वोट से 21 सितंबर को होगा। राज्य में 9 सितंबर और 11 सितंबर को दो चरणों में चुनाव हुए थे।

भाजपा-कांग्रेस को मिला 1-1 वोट

जैसलमेर जिले की परबतसर नगर पालिका के वार्ड 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद को महज एक वोट मिला। इसी तरह, रियांबड़ी नगर पालिका के वार्ड 15 में कांग्रेस प्रत्याशी मजीद मोहम्मद को भी एक ही वोट मिला।

जनता ने मोदी सरकार के काम पर मुहर लगाईः सीएम

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जनता एवं भाजपा कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा, यह राजस्थान की जनता एवं उन कार्यकर्ताओं को समर्पित है, जिन्होंने चुनाव में जीत के लिए मेहनत की है। जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले ढाई साल में हुए विकास कार्यों पर मुहर लगाई है। जनता ने मोदी के विकसित भारत और विकसित राजस्थान के विजन को स्वीकार किया है। युवाओं ने एक बार फिर पीएम पर भरोसा जताया है।

2028 की चुनौती

2028 के विधानसभा चुनाव अभी दो साल से भी अधिक दूर हैं और ये परिणाम सभी बड़ी पार्टियों के लिए रणनीति में बदलाव का आधार बनेंगे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर 41.7 प्रतिशत रहा था। कांग्रेस का दावा है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 15 प्रतिशत अंक गिर गया है। हालांकि, इसकी वास्तविक तस्वीर अंतिम नतीजे और वोटों के विभाजन के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

भाजपा जहां अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस भी अपनी रणनीति की नए सिरे से समीक्षा कर अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी करेगी। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटें जीती थीं और उसे 39.58 प्रतिशत वोट मिले थे।

फिलहाल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने पाले में लाने की है। इन चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच भाजपा को पीछे छोड़ते हुए कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत हासिल करने में नाकाम रही। ऐसे में आगामी दिनों में निर्दलीयों को साधना कांग्रेस के लिए अहम रणनीतिक चुनौती होगी।