राजस्थान में पार्षदों की लड़ाई में बदला जनादेश, थानों और कोर्टरूम तक पहुंचा चुनावी घमासान
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में पार्षदों को जबरन हिरासत में लेने, पुलिस दबाव और खरीद-फरोख्त के आरोपों के साथ राजनीतिक घमासान थानों और अदालतों तक पहुंच गया।
HighLights
शहरी निकाय चुनावों में जबरन हिरासत, पुलिस दबाव, खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगे।
हाई कोर्ट ने चुनाव टालने से इनकार किया, मतदान का समय बढ़ाया गया।
विभिन्न शहरों में बीजेपी, कांग्रेस, निर्दलीयों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई।
डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों का मामला सोमवार को पुलिस थानों और अदालतों तक पहुंच गया। कांग्रेस ने लोगों को जबरदस्ती हिरासत में लेने, पुलिस का दबाव और हॉर्स-ट्रेडिंग (पार्षदों की खरीद-फरोख्त) के आरोप लगाए।
यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनावों में भी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने उम्मीदवारों के साथ जबरदस्ती करने के आरोप लगाए हैं।
बीजेपी ने आरोपों से किया इनकार
बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। राज्य प्रमुख मदन राठौर ने कहा, "लोगों ने मोदी-भजन लाल सरकार के विकास और कल्याणकारी कार्यों पर अपनी मुहर लगाई है।"
अलवर का तिजारा इलाका तब चर्चा का केंद्र बन गया जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चेयरमैन पद के लिए वोटिंग से कुछ घंटे पहले 18 नवनिर्वाचित पार्षदों को हरियाणा में रोक दिया गया।
तिजारा नगर परिषद में 35 पार्षदों में से 31 निर्दलीय हैं, जबकि कांग्रेस के पास एक सीट है। कथित हिरासत के बाद दोपहर 1.40 बजे तक सिर्फ 16 लोगों ने वोट दिया था।
हाई कोर्ट ने चुनाव टालने से किया इनकार
राजस्थान हाई कोर्ट ने चुनाव टालने से मना कर दिया, लेकिन कहा कि पार्षदों को वोट देने के उनके कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता। आखिरकार वोटिंग रात 10 बजे तक बढ़ा दी गई, जिसमें कांग्रेस के सपोर्ट वाले एक निर्दलीय उम्मीदवार ने चेयरपर्सन का पद जीता। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, "यह चुनाव नहीं है, बल्कि सरकार की ताकत का इस्तेमाल करके मैंडेट हासिल करने की कोशिश है।"
कहां क्या हुआ?
- खैरथल में कांग्रेस ने पुलिस हैरेसमेंट का आरोप लगाया। कांग्रेस के पास 20 सीटें होने के बावजूद बीजेपी के विक्रम सिंह को 22 वोट मिले।
- जोधपुर के मथानिया में बीजेपी-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई, जिसके बाद कांग्रेस की लीला देवी 17-8 से जीतीं।
- हनुमानगढ़ में निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को पोलिंग से एक दिन पहले 23 साल पुराने कथित जाली लैंड डील केस में रविवार को गिरफ्तार किया गया। उनके समर्थकों को 60 में से 32 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को 15 और कांग्रेस को 10। उन्हें 25 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया।
- अजमेर में कांग्रेस के पास 80 में से 37 पार्षद थे और बीजेपी के पास 32, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों के पास 11 सीटें थीं लेकिन बीजेपी की अनामिका शर्मा 43 वोटों से जीतीं।
- भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 65 में से 36 वार्ड जीते और बीजेपी ने 20, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के हटने के बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह मेयर बनीं।
- बीजेपी ने जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा और उदयपुर नगर निगमों में बहुमत हासिल किया और अलवर में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन भरतपुर, अजमेर और पाली में बहुमत से पीछे रह गई।
- पाली में कांग्रेस के पास 29 और बीजेपी के पास 21 सीटें थीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों के पास 15 सीटें थीं लेकिन बीजेपी की नमिता बुबाकिया 33 वोटों से जीतीं।
- भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 65 वार्ड में से 36 जीते और बीजेपी ने 20 लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह मेयर बनीं।
- बीजेपी ने जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा और उदयपुर कॉर्पोरेशन में बहुमत हासिल किया और अलवर में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन भरतपुर, अजमेर और पाली में पीछे रह गई।
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