उदयपुर के BJP सांसद को परिवहन विभाग का अधिकारी समझकर भेजा नोटिस, जोधपुर में चुनाव कार्यालय की बड़ी लापरवाही
जोधपुर जिला निर्वाचन शाखा ने 2 साल पहले VRS ले चुके उदयपुर के BJP सांसद मन्ना लाल रावत को निकाय चुनाव ड्यूटी में लापरवाही का नोटिस भेजा।

BJP सांसद को परिवहन विभाग का अधिकारी समझकर भेजा नोटिस (स्क्रीनग्रबै- IANS)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, उदयपुर। राजस्थान की जोधपुर जिला निर्वाचन शाखा की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां 2 साल पहले सरकारी सेवा से VRS ले चुके और वर्तमान में उदयपुर से BJP के लोकसभा सांसद मन्ना लाल रावत को नगर निकाय चुनावों से जुड़ी ड्यूटी में लापरवाही का कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
हालांकि, सांसद द्वारा इस प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए जाने के बाद अधिकारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ और आनन-फानन में नोटिस वापस ले लिया गया।
2024 में लिया था VRS
दरअसल, साल 2024 में जोधपुर में परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त (जॉइंट कमिश्नर) पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले चुके रावत पर आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए राज्य सरकार के 'एंप्लॉयी मैनेजमेंट सिस्टम' पोर्टल पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की सूची अपडेट न करने का आरोप लगाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
प्रशासनिक लापरवाही का यह नोटिस जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), जो चुनाव अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, के हस्ताक्षरों से जारी हुआ था। हालांकि, बाद में जब अधिकारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ कि रावत 2 साल पहले ही सेवा से मुक्त होकर अब जनप्रतिनिधि बन चुके हैं, तो नोटिस को आनन-फानन में वापस ले लिया गया।
नोटिस वापस लेने के बाद संबंधित अधिकारी ने सांसद को फोन करके इस चूक के लिए खेद प्रकट किया।
सुरक्षा और विश्वसनीयता पर कैसे किया जा सकता भरोसा?
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उदयपुर के सांसद मन्ना लाल रावत ने सरकारी कार्यप्रणाली और डेटा मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब 2 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एक सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम सरकारी रिकॉर्ड से नहीं हटाया गया है, तो ऐसे में आम नागरिकों और सेवारत कर्मचारियों के डेटा की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर सरकारी विभागों पर कैसे भरोसा किया जा सकता है?
