कोटा: गिरकर नहीं, डिप्रेशन की वजह से छात्र ने छठी मंजिल से लगाई थी छलांग; जांच में हुआ खुलासा
कोटा में NEET की तैयारी कर रहे एक छात्र की मौत का खुलासा हुआ है कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि परीक्षा के तनाव और डिप्रेशन के कारण आत्महत्या थी। ...और पढ़ें

कोटा NEET छात्र की मौत का मामला (प्रतिकात्मक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे उत्तराखंड के एक छात्र की मौत हो गई। बताया जा रहा था कि छात्र की मौत हॉस्टल की छठी मंजिल से गिरकर हुई, लेकिन अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है।
पुलिस ने CCTV फुटेज और सुसाइड नोट के आधार पर पुष्टि की है कि छात्र की मौत दुर्घटनावश गिरने से नहीं, बल्कि परीक्षा के तनाव और डिप्रेशन के कारण आत्महत्या से हुई है।
पुलिस ने बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला दीक्षित प्रसाद (20) डिप्रेशन में था और उसे अपनी परीक्षाओं को लेकर तनाव था। रविवार को होने वाली NEET परीक्षा से ठीक एक दिन पहले शनिवार को उसने हॉस्टल की छठी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। यह हादसा कुन्हाड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत लैंडमार्क सिटी में हुआ।
NEET की तैयारी कर रहा था छात्र
पुलिस ने बताया कि वह पिछले दो सालों से यहां एक कोचिंग संस्थान में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की तैयारी कर रहा था और इमारत की चौथी मंज़िल पर बने एक कमरे में रह रहा था। शुरुआत में शनिवार को पुलिस ने कहा था कि हो सकता है कि इमारत से गलती से गिरने के कारण उसकी मौत हुई हो।
NEET परीक्षा को लेकर तनाव में था छात्र
कुन्हाड़ी पुलिस स्टेशन के सर्किल इंस्पेक्टर देवेश भारद्वाज ने PTI को बताया कि CCTV फुटेज और उसके कमरे से बरामद सुसाइड नोट की जांच से पता चला कि प्रसाद छठी मंजिल पर चढ़ा और कूदकर अपनी जान दे दी। जांच से पता चला कि वह डिप्रेशन और तनाव में था, क्योंकि उसे लगता था कि वह NEET परीक्षा पास नहीं कर पाएगा।
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उसके माता-पिता रविवार सुबह तड़के कोटा पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें शव सौंप दिया। अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम कर दिया गया है, और मौत के असली कारण का पता लगाने के लिए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों के लिए दिशा निर्देश जारी
कोटा प्रशासन ने रविवार को कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए, और उनसे आग्रह किया कि वे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे तनाव, डिप्रेशन, अकेलापन या घबराहट के शुरुआती लक्षणों की पहचान करें, और तुरंत काउंसलिंग, भावनात्मक सहयोग और बातचीत के खुले माध्यम उपलब्ध कराएं।
इसके अलावा, तनाव, सुरक्षा संबंधी चिंताओं या भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों के लिए कई हेल्पलाइन सेवाएं शुरू की गई हैं। छात्र मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष 'स्टूडेंट सेल' हेल्पलाइन (95304-42778) पर संपर्क कर सकते हैं। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)