Indira Ekadashi 2026: 07 अक्टूबर को कब है पारण का शुभ मुहूर्त? यहां देखें सही समय और विधि
इंदिरा एकादशी का व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पितृ पक्ष में रखा जाता है, जिसका पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है।

कैसे करें इंदिरा एकादशी व्रत का पारण? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
इंदिरा एकादशी व्रत पितृ पक्ष में पड़ता है, अत्यधिक महत्वपूर्ण।
07 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:17 से 08:38 तक पारण।
पारण के लिए स्नान, पूजा, दान और सात्विक भोजन का विधान।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इंदिरा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह एकादशी पितृ पक्ष में पड़ती है, जिसके कारण इसका अधिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्त के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि एकादशी व्रत का पारण न करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए इस व्रत का विधिपूर्वक पारण जरूर करें। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कब और कैसे करें इंदिरा एकादशी का व्रत पारण।
इंदिरा एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Indira Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 अक्टूबर को देर रात 02 बजकर 07 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 07 अक्टूबर को देर रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत 06 अक्टूबर को रखा जाएगा और व्रत पारण अगले दिन यानी 07 अक्टूबर को किया जाएगा।
इंदिरा एकादशी पारण का समय (Indira Ekadashi Paran Timing)
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करने का अधिक महत्व है। 07 अक्टूबर को व्रत का पारण करने का समय सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर 08 बजकर 38 मिनट तक है। इस मुहूर्त में किसी भी समय पारण किया जा सकता है।
इंदिरा एकादशी पारण की विधि
- द्वादशी तिथि के दिन स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- घर के मंदिर को साफ करें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने देसी घी का दीपक जलाएं।
- उन्हें फल, फूल, चंदन, धूप और तुलसी दल अर्पित करें।
- सच्चे मन से प्रभु की आरती करें।
- विष्णु चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करें।
- फिर प्रभु को सात्विक भोजन का भोग लगाएं।
- मंदिर या किसी ब्राह्मण को आटा, दाल, चावल और धन का दान करें।
- अंत में व्रत का पारण करें।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी तिथि पर दान करने से शुभ परिणाम मिलते हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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