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    मोहिनी एकादशी 2026 आज, नोट करें पूजा की सही विधि, नियम और जल दान का विशेष महत्व

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 09:22 AM (IST)

    मोहिनी एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें शुभ मुहूर्त? साथ ही, इस पावन व्रत की विधि, पूजन सामग्री और दान का आध्यात्मिक महत्व यहां प ...और पढ़ें

    मोहिनी एकादशी 2026: कैसे करें पूजा? (Image Source: AI-Generated)

    मोहिनी एकादशी 2026: कैसे करें पूजा? (Image Source: AI-Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है, अपनी एक अलग ही आभा समेटे हुए है। साल 2026 में यह पावन तिथि 27 अप्रैल, सोमवार को पड़ रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान असुरों ने अमृत पर कब्जा कर लिया था, तब भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' का रूप धरकर संसार की रक्षा की थी। यह दिन न केवल व्रत का है, बल्कि अपने मन और आत्मा को शुद्ध करने का एक सुनहरा अवसर भी है।

    मोहिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

    एकादशी तिथि का प्रारंभ: यह पावन तिथि 26 अप्रैल 2026 को शाम 06:06 बजे शुरू होगी।

    एकादशी तिथि का समापन: तिथि का अंत अगले दिन यानी 27 अप्रैल 2026 को शाम 06:15 बजे होगा।

    व्रत की तारीख: उदया तिथि की गणना के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल 2026, सोमवार के दिन रखा जाएगा।

    हिंदू धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही व्रत-उपवास के लिए प्रधान माना जाता है, इसलिए सोमवार का दिन साधना के लिए श्रेष्ठ रहेगा।

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    (Image Source: AI-Generated)

    पूजन विधि

    भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए दिखावे से अधिक भाव की आवश्यकता होती है। पूजा के दौरान इन सरल चरणों का पालन करें:

    सुबह की शुरुआत: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले रंग के) धारण करें। मन ही मन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

    पीले रंग का महत्व: विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। पूजा में पीले फूल, मौसमी पीले फल और चंदन का तिलक जरूर लगाएं।

    मंत्र की शक्ति: सारा दिन अपना काम करते हुए भी मानसिक रूप से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करते रहें। यह मंत्र मन को भटकने से रोकता है।

    क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में आरती करें और अनजाने में हुई गलतियों के लिए भगवान से माफी मांगें। याद रखिए, सच्ची भक्ति में अहंकार के लिए कोई जगह नहीं होती।

    इन 4 गलतियों से बचें

    व्रत के फल को सुरक्षित रखने के लिए शास्त्रों में कुछ मनाही भी हैं:

    चावल का सेवन: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन अशुद्धि का कारक बनता है।

    आहार की शुद्धता: व्रत के दौरान लहसुन, प्याज या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से दूर रहें। सात्विक आहार ही मन को शांत रखता है।

    तुलसी के पत्ते: तुलसी माता विष्णु जी को प्रिय हैं, लेकिन एकादशी के दिन उन्हें तोड़ना वर्जित है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

    वाणी पर संयम: किसी की निंदा करना, झूठ बोलना या बेवजह गुस्सा करना आपके पुण्य को कम कर सकता है। इस दिन मौन या मीठी वाणी का अभ्यास करें।

    गर्मी का महीना और 'सेवा' का पुण्य

    वैशाख का महीना अपनी तपन के लिए जाना जाता है। इस मोहिनी एकादशी पर जल सेवा का विशेष महत्व है। किसी प्यासे को पानी पिलाना या राहगीरों के लिए ठंडे जल की व्यवस्था करना साक्षात नारायण की सेवा के समान है। जब हम दूसरों के प्रति दया भाव रखते हैं, तो हमारा व्रत आध्यात्मिक रूप से और भी गहरा हो जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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