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    पापमोचनी एकादशी 2026: एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं? जानें शास्त्रों के नियम

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 06:48 PM (GMT+05:30)

    Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी पर बाल धोना शुभ है या अशुभ? जानें शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत के जरूरी नियम। ...और पढ़ें

    Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी के नियम (Image Source: AI-Generated)

    Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी के नियम (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। साल 2026 में पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi 2026) का पावन पर्व 15 मार्च को मनाया जाएगा।

    लेकिन, इस दिन को लेकर अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल रहता है कि क्या एकादशी के दिन बाल धोने चाहिए या नहीं? अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग इस दिन बाल धोने, नाखून काटने या साबुन का इस्तेमाल करने से मना करते हैं।

    एकादशी पर बाल क्यों नहीं धोने चाहिए?

    शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का दिन मन और शरीर की शुद्धि का होता है। इस दिन बाल न धोने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जाते हैं:

    • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हम सिर धोते हैं, तो पानी के साथ हमारे सिर पर मौजूद बहुत ही सूक्ष्म जीवों (Micro-organisms) की अनजाने में मृत्यु होने की संभावना रहती है। एकादशी व्रत में 'अहिंसा' का पालन करना अनिवार्य है, इसलिए किसी भी प्रकार की जीव-हत्या (चाहे वह सूक्ष्म ही क्यों न हो) से बचने के लिए बाल धोना वर्जित माना गया है।
    • एकादशी का दिन (Ekadashi Ka Din) भगवान विष्णु की भक्ति का है। इस दिन बाहरी साज-सज्जा और शारीरिक श्रृंगार के बजाय आंतरिक शुद्धता पर जोर दिया जाता है। बाल धोना या सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करना विलासिता का प्रतीक माना जाता है, जिससे ध्यान भटक सकता है।

    अगर बाल धोना बहुत जरूरी हो, तो क्या करें?

    धर्म हमें मुश्किल में नहीं डालता, बल्कि एक अनुशासित जीवन जीना सिखाता है। अगर किसी मजबूरी के कारण आपको बाल धोने ही पड़ें, तो इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एकादशी से एक दिन पहले, यानी 'दशमी' तिथि को ही बाल धोकर खुद को शुद्ध कर लें। इससे एकादशी के दिन नियमों का उल्लंघन भी नहीं होगा और आप स्वच्छता से पूजा भी कर पाएंगे।

    Ekadashi Rules

    (Image Source: AI-Generated)

    क्या कहते हैं हमारे शास्त्र?

    • पद्म पुराण के 'क्रियायोगसार' खंड में बताया गया है कि एकादशी के दिन व्रती को दातुन करने और बाल धोने से बचना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की हिंसा न हो और व्रत की पवित्रता बनी रहे।
    • विष्णु पुराण के अनुसार, एकादशी के दिन जो व्यक्ति संयम और सात्विकता का पालन करता है, उसे ही पूर्ण फल मिलता है। इस दिन शरीर की अत्यधिक सफाई के बजाय नाम-जप और दान का महत्व अधिक है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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