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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Papmochani Ekadashi 2025: वैष्णव जन कब मनाएंगे पापमोचनी एकादशी? यहां नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Tue, 18 Mar 2025 08:15 PM (IST)

    धार्मिक मत है कि भगवान विष्णु (Papmochani Ekadashi 2025) के शरण और चरण में रहने वाले साधकों पर धन की देवी मां लक्ष्मी विशेष कृपा बरसती है। उनकी कृपा स ...और पढ़ें

    Papmochani Ekadashi 2025: पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व
    Papmochani Ekadashi 2025: पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. पापमोचनी एकादशी चैत्र महीने में मनाया जाता है।
    2. चैत्र महीने में धूमधाम से नवरात्र मनाया जाता है।
    3. एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा की जाती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी का खास महत्व है। यह पर्व कृष्ण और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

    सनातन शास्त्रों में निहित है कि एकादशी व्रत करने से साधक द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही साधक पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है। एकादशी तिथि को लेकर भक्त जन हमेशा दुविधा में रहते हैं। आइए, पापमोचनी एकादशी की सही डेट और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

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    पापमोचनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Papmochani Ekadashi Shubh Muhurat)

    चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पापमोचनी एकादशी मनाई जाती है। इस साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी 25 मार्च को सुबह 05 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगी और 26 मार्च को देर रात 03 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना होती है। इसके लिए 25 मार्च को पापमोचनी एकादशी मनाई जाएगी। सामान्य जन 26 मार्च के दिन पारण करेंगे। 26 मार्च के दिन पारण का समय दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 08 मिनट तक है।

    वैष्णव जन कब मनाएंगे पापमोचनी एकादशी

    सामान्य जन 25 मार्च के दिन एकादशी का व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करेंगे। वहीं, वैष्णव जन 26 मार्च के दिन पापमोचनी एकादशी मनाएंगे। इस शुभ अवसर वैष्णव साधक एकादशी का व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करेंगे। साथ ही दिन भर व्रत रखेंगे। वहीं, संध्याकाल में आरती के बाद फलाहार करेंगे। वैष्णव जन पापमोचनी एकादशी का पारण 27 मार्च को सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 23 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं।

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    पापमोचनी एकादशी शुभ योग (Papmochani Ekadashi Shubh Yoga)

    ज्योतिषियों की मानें तो पापमोचनी एकादशी पर दुर्लभ शिववास और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलेगा। साथ ही जीवन में व्याप्त दुखों का नाश होगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।