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    Parivartini Ekadashi 2025 Date: 02 या 03 सितंबर, कब है परिवर्तिनी एकादशी? यहां जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 09:00 PM (IST)

    ज्योतिषियों की मानें तो आयुष्मान और सौभाग्य योग समेत कई मंगलकारी संयोग में परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2025 Yoga) मनाई जाएगी। इन योग में ल ...और पढ़ें

    Parivartini Ekadashi 2025 Kis Din Hai: भगवान विष्णु को कैसे प्रसन्न करें?
    Parivartini Ekadashi 2025 Kis Din Hai: भगवान विष्णु को कैसे प्रसन्न करें?

    HighLights

    1. भाद्रपद का महीना भगवान गणेश को समर्पित होता है।
    2. इस महीने में गणेश जी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है।
    3. भगवान गणेश की पूजा करने से सुखों में वृद्धि होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद का महीना बेहद खास माना जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष में जगत के पालनहार भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वहीं, शुक्ल पक्ष में राधा रानी का अवतरण दिवस मनाया जाता है। साथ ही भाद्रपद महीने में गणेश महोत्सव भी मनाया जाता है। इसके अलावा, भाद्रपद महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं।

    भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। आइए, परिवर्तिनी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व जानते हैं-

    महत्व

    एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और साधना करने से देवी मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। अपनी कृपा साधकों पर बरसाती हैं। देवी मां लक्ष्मी की कृपा से साधक की हर एक मनोकामना पूरी होती है। साथ ही घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में लक्ष्मी नारायण जी की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही दान-पुण्य भी किया जाता है।

    परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Parivartini Ekadashi Shubh Muhurat)

    • एकादशी तिथि का आरंभ - 03 सितंबर को देर रात 03 बजकर 53 मिनट पर
    • एकादशी तिथि का समापन- 04 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट पर

    कब मनाई जाएगी परिवर्तिनी एकादशी?

    सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। आसान शब्दों में कहें तो सूर्योदय के बाद से तिथि की गणना होती है। हालांकि, प्रदोष और निशा काल में होने वाली पूजा के लिए उदया तिथि से गणना नहीं होती है। इस प्रकार 03 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाएगी।

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    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजे से...
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 40 मिनट पर
    • चन्द्रोदय- शाम 03 बजकर 51 मिनट पर
    • चंद्रास्त- देर रात 02 बजकर 07 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 15 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 40 मिनट से 07 बजकर 03 मिनट से
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।