Rangbhari Ekadashi 2026: पारण के बिना अधूरा है रंगभरी एकादशी व्रत, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि
रंगभरी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करना अनिवार्य है, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के विधिपूर्वक पारण स ...और पढ़ें

कैसे करें रंगभरी एकादशी व्रत का पारण (Image Source: AI-Generated)
HighLights
रंगभरी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी 2026 को होगा
पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06:47 से 09:06 बजे तक है
भगवान विष्णु की पूजा कर चरणामृत से व्रत खोलें
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन माह की रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi 2026) व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। ऐसा माना जाता है कि व्रत का पारण न करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
इसलिए द्वादशी तिथि पर पारण कर अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी। रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi 2026) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं रंगभरी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में।
रंगभरी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Rangbhari Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, रंगभरी एकादशी व्रत 27 फरवरी को किया जाएगा।
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 27 फरवरी को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर
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(Image Source: AI-Generated)
रंगभरी एकादशी 2026 व्रत पारण टाइम (Rangbhari Ekadashi 2026 Vrat Paran Time)
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में इस व्रत का पारण 28 फरवरी को किया जाएगा।
व्रत का पारण करने का मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक।
खबरें और भी
ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 05 बजकर 08 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 58 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
विजय मुहूर्त- 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
रंगभरी एकादशी व्रत पारण विधि (Rangbhari Ekadashi Vrat Paran Vidhi)
- इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान कर सूर्य देव अर्घ्य दें।
- मंदिर की सफाई करें।
- भगवान विष्णु को फल, फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
- देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें।
- प्रभु की आरती करें।
- जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
- सात्विक भोजन का भोग लगाएं।
- आखिरी में चरणामृत और तुलसी के पत्ते से व्रत का पारण करें।
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