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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Amarnath Yatra 2024: जानें, कैसे पड़ा बाबा बर्फानी की गुफा का नाम अमरनाथ? पढ़ें इससे जुड़ी कथा

    Updated: Sun, 30 Jun 2024 01:09 PM (GMT+05:30)

    हिंदुओं के लिए पवित्र तीर्थस्थल अमरनाथ धाम (Amarnath Yatra 2024) है। धार्मिक मान्यता है कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति हो ...और पढ़ें

    Amarnath Yatra 2024: अमरनाथ गुफा से जुड़ी कथा
    Amarnath Yatra 2024: अमरनाथ गुफा से जुड़ी कथा

    HighLights

    1. हर साल अमरनाथ यात्रा होती है।
    2. भक्त अधिक संख्या में शामिल होते हैं।
    3. यात्रा 2 महीने तक चलती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Amarnath Yatra 2024 Katha: हर वर्ष बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है। इस यात्रा में अधिक संख्या में शिव भक्त शामिल होते हैं। बेहद कठिन रास्तों के बाद भी श्रद्धालुओं में बेहद खास उत्साह देखने को मिलता है। भगवान शिव के नाम का जप कर यात्रा को पूरी कर बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं।

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    पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने मां पार्वती को मोक्ष का मार्ग दिखाया था। मां पार्वती ने महादेव से मार्ग जानने के लिए इच्छा जताई। इसके बाद शिव जी ने मां पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई। इस दौरान वहां पर दो कबूतर भी मौजूद थे। कबूतर के जोड़े ने अमृतज्ञान की कथा सुन ली, जिसके बाद कबूतर का जोड़ा अमर हो गया। श्रद्धालुओं ने गुफा में उन्हें देखने का भी दवा किया है। अमर कथा साक्षी होने की वजह से इस गुफा को अमरनाथ गुफा कहा जाता है।

    महादेव ने अमरनाथ गुफा में जाने से पूर्व महागुण पर्वत पर अपने पुत्र गणपति बप्पा को विराजमान किया था। प्रभु ने उनको जिम्मेदारी दी कि कथा के समय गुफा के अंदर कोई न आए। गुफा में जाने से पहले शिव जी ने नंदी का त्याग किया था। उस स्थल का नाम पहलगांव पड़ा। इसके पश्चात उन्होंने चंद्रमा का त्याग किया, जिसे चंदनवाड़ी के नाम से जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने सर्प का त्याग किया और वहां का नाम शेषनाग पड़ा। अंत में उन्होंने जटाओं में मां गंगा का त्याग किया। उस जगह का नाम पंचतरणी के नाम जाना गया।

    इस दिन होगा यात्रा का समापन

    प्रत्येक वर्ष अमरनाथ का यात्रा प्रारंभ आषाढ़ माह से होती है, जिसका समापन रक्षाबंधन पर होता है। वर्ष 2024 में 29 जून से हो गया है। वहीं, 19 अगस्त को समाप्त होगी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

     

     

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