ज्योतिर्लिंग भी और शक्तिपीठ भी... भारत के इस अनोखे शिव मंदिर का रहस्य जानकर दंग रह जाएंगे आप!
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से दूसरा है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां ज्योतिर्लिंग के साथ ...और पढ़ें

श्रीशैलम पर्वत पर बसा महादेव का मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का जिक्र किया गया है। सभी ज्योतिर्लिंग एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हुए भी असंख्य लोगों के बीच आस्था का केंद्र बने हुए हैं। शिवपुराण के अनुसार, अन्य दिनों की तुलना में श्रावण मास में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। देशभर में अलग-अलग स्थानों पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिसमें मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग दूसरे स्थान पर आता है। यह मंदिर दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा जाता है कि, यह ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ एक शक्तिपीठ भी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि, भारत में सिर्फ तीन ही ऐसे मंदिर हैं, जहां ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी विराजमान हैं।
इस ज्योतिर्लिंग को लेकर मान्यता है कि, भगवान शिव अमावस्या के दिन अर्जुन के रूप में और माता पार्वती पूर्णिमा के मौके पर मल्लिका के रूप में प्रकट हुईं थी, इस वजह से उनका नाम मल्लिकार्जुन पड़ा। मंदिर में माता पार्वती को भ्रामम्बा देवी के रूप में पूजा जाता है। इसे दक्षिण का कैलाशा भी माना जाता है।
स्कंद पुराण के श्री शैल कांड में मंदिर का वर्णन देखने को मिलता है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि, यहां दर्शन और पूजा करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास
मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर के निर्माण कार्य और संरक्षण में कई शासकों की अहम भूमिका रही है। इस मंदिर के बारे में पहला रिकॉर्ड प्रथम ई. में शाथवाहन साम्राज्य निर्माताओं की पुस्तकों में देखने को मिलता है। इसके बाद पल्लव, इक्ष्वाकु, चालुक्य और रेड्डीज ने भी मंदिर के संरक्षण से लेकर निर्माण में अहम भूमिका अदा की।
इसके बाद विजयनगर साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी मंदिर में तमाम तरह के सुधार किए। मुगल शासन के दौरान इस मंदिर में पूजा बंद हो गई थी, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इसे फिर से चालू किया गया।
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें
मल्लिकार्जुन मंदिर की दीवारें 600 फीट की ऊंचाई वाली हैं। दीवारों पर कई तरह के अद्भुत मूर्तियों की नक्काशी की गई है, जो इस मंदिर में आकर्षण का केंद्र मानी जाती है।
ऐसा माना जाता है कि, माता पार्वती ने राक्षस महिषासुर से युद्ध किया था और खुद को मधुमक्खियों में बदल लिया था। मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि, वे अभी भी भ्रमरम्बा मंदिर के एक छेद से मुधमक्खी की भिनभिनाहट की आवाज सुन सकते हैं।
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