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संगमरमर नहीं, 9 खतरनाक जहर से बनी है भगवान मुरुगन की ये मूर्ति! पलानी मंदिर का ये रहस्य आपको चौंका देगा

Published: Thu, 16 Jul 2026 11:08 AM (IST)

तमिलनाडु के पलानी स्थित भगवान मुरुगन मंदिर की मूर्ति का रहस्य उजागर किया गया है। संत बोगर द्वारा नवपाषाण से निर्मित यह मूर्ति औषधीय गुणों से भरपूर है।

9 विषैले पदार्थ से बनी पलानी मुरुगन की मूर्ति

9 विषैले पदार्थ से बनी पलानी मुरुगन की मूर्ति

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के पलानी में स्थित भगवान मुरुगन का मंदिर उनके 6 प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां वो दंडायुधापाणि रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर में भगवान मुरुगन की मूर्ति निर्माण की कहानी के पीछे का प्राचीन रहस्य जानकार आपके भी होश उड़ जाएंगे।

पलानी में स्थित भगवान मुरुगन की यह मूर्ति एक तपस्वी के रूप में है। संसार को त्यागने के बाद भगवान दंडायुधापाणि अपने दाहिने हाथ में दंड और गर्दन में रुद्राक्ष की माला पहने हुए हैं। भगवान मुरुगन की मूर्ति सांसारिक वस्तुओं का त्याग कर सिर्फ लंगोटी धारण किए है।

संत बोगर ने बनाई थी पलानी मुरुगन की मूर्ति

तमिलनाडु पलानी में स्थित भगवान मुरुगन के इस मंदिर को कई ऋषियों और सिद्धों की तपस्या से पवित्र किया गया है। लेकिन पलानी मुरुगन की इस मूर्ति से जुड़ी कथाओं में सबसे अहम भूमिका संत बोगर की है।

हिंदू धर्म के 18 महान सिद्धों में शामिल बोगर मुरुगन भगवान के भक्त होने के साथ-साथ एक सिद्ध रसायन के जानकार भी थे। कहा जाता है कि, उन्होंने ने ही पलानी मुरुगन की प्रतिमा की रचना कर उस पवित्र की।

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पलानी मुरुगन की नव पाषाण मूर्ति

पलानी मुरुगन की मूर्ति क्यों हैं अलग?

हिंदू परंपराओं में जहां अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां आमतौर पर संगमरमर या ग्रेनाइट से बनाई जाती है, लेकिन पलानी मुरुगन की मूर्ति नवपासन नामक एक मिश्रण से तैयार की गई थी।

संस्कृत में नव शब्द के दो मतलब निकलते हैं। नव का मतलब नया और नौ दोनों होता है। इसी तरह भासन शब्द के भी दो मतलब होते हैं। भासन का मतलब विष यानी जहर और खनिज हो सकता है।

नव पाषाण पदार्थ कौन-कौन से थे?

संत भोगर द्वारा निर्माण किया गया रहस्यमय पदार्थ जिसे नव पाषाणम यानी नौ शक्तिशाली पदार्थ कहा जाता है, जो रासायनिक रूप से एक होने पर औषधीय गुण का काम करते हैं।

  • परा
  • सल्फर
  • आर्सेनिक
  • एंटीमनी
  • सीसा
  • कॉपर सल्फेट
  • सोना
  • चांदी
  • लोहा

माना जाता है कि, संत बोगर ने 9 जहरीली धातुओं के एक मिश्रण से मूर्ति का निर्माण कराया था। उन्होंने इन सभी विषैले धातुओं का इस्तेमाल करते हुए, इसे ग्रेनाइट की तरह मजबूत बनाया और इसे औषधीय गुणों वाले एक अत्यंत लाभकारी मिश्रण में बदल दिया।

कहा जाता है कि मूर्ति के संपर्क में आने वाले पदार्थ उपचार शक्ति की क्षमता हासिल कर लेते हैं। मूर्ति पर चंदन का लेप लगाकर पूरी रात के लिए छोड़ देने से कई असाध्य और जटिल रोगों से चमत्कारिक फायदा देखने को मिलता है।

भगवान कार्तिकेय का अन्य नाम मुरुगन

आज भी तमिलनाडु के पलानी की तीर्थयात्रा पर आने वाले भक्त मंदिर के दक्षिण-पश्चिम गलियारे में स्थित बोगर के मंदिर में दर्शन करने के लिए जरूर जाते हैं। लोकप्रचलित मान्यता है कि, यह पलानी पहाड़ियों के बीच में स्थित भूमिगत सुरंग गुफा से जुड़ा हुआ है, जहां बोगर भगवान मुरुगन की आठ मूर्तियों के साथ ध्यान करते हुए अपनी सच्ची श्रद्धा जाहिर करते हैं।

हिंदू धर्म में भगवान मुरुगन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र और भगवान श्रीगणेश के भाई हैं। तमिल समुदाय से जुड़े लोग भगवान कार्तिकेय को संरक्षक का देवता मानते हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उनके कई पवित्र निवास स्थल हैं। उनमें से अधिकतर पहाड़ियों पर हैं।

पलानी मुरुगन की मूर्ति

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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