चैत्र नवरात्र 2026: मां दुर्गा को प्रसन्न करने के 10 सिद्ध महामंत्र, नवरात्र में जरूर करें इनका जप
चैत्र नवरात्र 2026 के पावन अवसर पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने और सुख-समृद्धि पाने के लिए विशेष दुर्गा मंत्रों का जप करें। जानें मां दुर्गा के शक्तिशाल ...और पढ़ें

Maa Durga Mantras: चैत्र नवरात्र 2026 पर करें इन मंत्रों का जप (Image Sources: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू नववर्ष के आगमन के साथ ही चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पावन पर्व शुरू होता है, जो मां दुर्गा की असीम शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। साल 2026 में, यह आज 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा।
इन नौ दिनों में भक्त मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों (Maa Durga Mantras) का विधि-विधान से जप करने से न केवल जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की भी प्राप्ति होती है।
मां की कृपा पाने और अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए, आइए जानते हैं नवरात्र 2026 (Navratri 2026) के लिए विशेष और प्रभावी माँ दुर्गा मंत्र।
मां दुर्गा मंत्र (Maa Durga Mantras)
1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥
हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥
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2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
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3. रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥
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4. देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥
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5. जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥
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6. सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥
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7. “दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥”
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8. शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥
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9. देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
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10. नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे |
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||
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