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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Masik Durgashtami 2024: मासिक दुर्गाष्टमी पर पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप, दूर हो जाएंगे सभी कष्ट

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Mon, 10 Jun 2024 10:00 PM (IST)

    धार्मिक मत है कि मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा-उपासना करने से साधक को सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सकल मनोरथ सिद्ध होते है ...और पढ़ें

    Masik Durgashtami 2024: मासिक दुर्गाष्टमी पर पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप
    Masik Durgashtami 2024: मासिक दुर्गाष्टमी पर पूजा के समय करें इन मंत्रों का जप

    HighLights

    1. हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है।
    2. इस दिन जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा-उपासना की जाती है।
    3. मां दुर्गा की पूजा करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Masik Durgashtami 2024: सनातन पंचांग के अनुसार, 14 जून को ज्येष्ठ माह की मासिक दुर्गाष्टमी है। इस दिन जगत जननी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। साथ ही घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। मासिक दुर्गाष्टमी व्रत करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से आराध्या मां दुर्गा की पूजा करते हैं। अगर आप भी अपने जीवन में व्याप्त दुख और संताप से निजात पाना चाहते हैं, तो मासिक दुर्गाष्टमी पर स्नान-ध्यान के बाद विधिपूर्वक मां दुर्गा की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

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    मां दुर्गा के मंत्र

    1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,

    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

    2. पाप नाशक मंत्र

    हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।

    सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

    3. संकट से मुक्ति के लिए मंत्र

    शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।

    सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

    4. रोग रक्षा मंत्र

    रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।

    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

    5. पुत्र प्राप्ति मंत्र

    देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।

    देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

    6. दुख नाशक मंत्र

    जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

    दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥

    7. शक्ति प्राप्ति के लिए मंत्र

    सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।

    गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

    8. धन प्राप्ति के लिए मंत्र

    “दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:

    स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

    दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या

    सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

    9. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

    शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

    10. पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत सङ्कटात् ॥

    उमा देवी शिरः पातु ललाटं शूलधारिणी ।

    चक्षुषी खेचरी पातु वदनं सर्वधारिणी ॥

    जिह्वां च चण्डिका देवी ग्रीवां सौभद्रिका तथा ।

    अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ॥

    हृदयं ललिता देवी उदरं सिंहवाहिनी ।

    कटिं भगवती देवी द्वावूरू विन्ध्यवासिनी ॥

    महाबाला च जङ्घे द्वे पादौ भूतलवासिनी

    एवं स्थिताऽसि देवि त्वं त्रैलोक्यरक्षणात्मिके ।

    रक्ष मां सर्वगात्रेषु दुर्गे दॆवि नमोऽस्तु ते ॥

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