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    Guruvar Vrat: इस आरती के बिना अधूरी है भगवान विष्णु की पूजा, खुशियों से भर जाएगा संसार

    Updated: Wed, 04 Mar 2026 08:00 PM (IST)

    सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से नौकरी, संतान प्राप्ति और शी ...और पढ़ें

    Rama Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

    Rama Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। साथ ही गुरुवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं और अविवाहित लड़कियां करती हैं।

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    गुरुवार का व्रत करने से जॉब की परेशानी दूर होती है। निसंतान दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। वहीं, अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। अगर आप भी भगवान विष्णु को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन भक्ति भाव से श्रीहरि और तुलसी मां की पूजा करें। वहीं, पूजा का समापन तुलसी आरती से करें।

    ॥ श्री तुलसी जी की आरती ॥

    जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता।
    सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,
    रुज से रक्षा करके भव त्राता।
    जय जय तुलसी माता...

    बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या,
    विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
    जय जय तुलसी माता...

    हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,
    पतित जनों की तारिणि, तुम हो विख्याता।
    जय जय तुलसी माता...

    लेकर जन्म बिजन में आई दिव्य भवन में,
    मानव लोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता।
    जय जय तुलसी माता...

    हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी,
    प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता।
    जय जय तुलसी माता...

    ॥ आरती श्री जगदीशजी ॥


    ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
    भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
    स्वामी दुःख विनसे मन का।
    सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
    स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
    तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
    स्वामी तुम अन्तर्यामी।
    पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
    स्वामी तुम पालन-कर्ता।
    मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
    स्वामी सबके प्राणपति।
    किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
    स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
    अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

    विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
    स्वमी पाप हरो देवा।
    श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
    ॐ जय जगदीश हरे।
    श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

    स्वामी जो कोई नर गावे।
    कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
    ॐ जय जगदीश हरे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।