यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
देवगुरु बृहस्पति के ये मंत्र धन, वैभव व सम्मान दायक है
देवगुरु बृहस्पति के मंत्र धन व वैभव की दृष्टि से चमत्कारी है । जरूरत है इन्हें एक साथ निरंतर जपने ...और पढ़ें

सूर्य के बाद सबसे विशाल ग्रह भी बृहस्पति ही है। देवपूज्य बृहस्पति या गुरु दार्शनिक, आध्यात्मिक ज्ञान को निर्देशित करने वाला उत्तम ग्रह माना गया है। सभी देवों के गुरु है बृहस्पति देव । जिनको प्रसन्न करने से जिदगी में धन अभाव तो नहीं हीं रहता यश, सम्मान की भी अवश्य प्राप्ति होती है ।
बृहस्पति देव की चार भुजाएं हैं, तीन भुजाओं में दण्ड, रुद्राक्ष की माला और कमण्डलु तथा चौथी भुजा वरमुद्रा में है। बृहस्पति की प्रतिमा पीले रंग की होनी चाहिए। श्वेत चावलों की वेदी के उत्तर में बृहस्पति देव की स्थापना करनी चाहिए। बृहस्पति के अधिदेव भगवान ब्रह्मा माने जाते हैं। बृहस्पति को दही-भात का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।
बृहस्पति का मंत्र:
ऊं नमो अर्हते भगवते श्रीमते वर्धमान तीर्थकराय मातंगयक्ष |
सिद्धायिनीयक्षी सहिताय ऊं आं क्रों ह्रीं ह्र: गुरु महाग्रह मम दुष्टग्रह,
रोग कष्ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू फट् ||
मध्यम यंत्र-
ऊं औं क्रौं ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं गुरु अरिष्ट निवारक ऋषभ अजितसंभव
अभिनंदन सुमति सुपार्श्वशीतल श्रेयांसनाथ अष्ट जिनेन्द्रेभ्यो नम: शान्तिं कुरू कुरू स्वाहा ||
लघु मंत्र - ऊं ह्रीं णमो उवज्झायाणं ||
तान्त्रिक मंत्र- ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम: ||
देवगुरु बृहस्पति के तंत्रोक्त मंत्र ना सिर्फ धन और वैभव की दृष्टि से चमत्कारी है बल्कि तुरंत असर करने वाले हैं। जरूरत है इन्हें एक साथ निरंतर जपने की। आप किसी भी एक गुरु मंत्र का गुरुवार के दिन जप कर सकते हैं।
देवगुरु बृहस्पति के चमत्कारी मंत्र
* ॐ बृं बृहस्पतये नम:।
* ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:।
* ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।
* ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:।
* ॐ गुं गुरवे नम:।
