Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sarva Pitru Amavasya के दिन इस स्तोत्र का करें पाठ, पितृ दोष से मिलेगा छुटकारा

    Updated: Sun, 29 Sep 2024 02:14 PM (IST)

    सनातन धर्म में पितृ पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया है जिनका श्राद्ध पितृ पक्ष में किसी कारण ...और पढ़ें

    Sarva Pitru Amavasya 2024: इस स्तोत्र के पाठ से पितृ होंगे प्रसन्न
    Sarva Pitru Amavasya 2024: इस स्तोत्र के पाठ से पितृ होंगे प्रसन्न

    HighLights

    1. अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है।
    2. इस दिन पितरों का तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है।
    3. पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या पर होता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। इस दिन पितरों और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विशेष चीजों का दान किया जाता है। पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण आदि कार्य किए जाते हैं। सर्वपितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya 2024) की पूजा के दौरान पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इसका पाठ करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। साथ ही पितृ प्रसन्न होते हैं।

    सर्वपितृ अमावस्या 2024 डेट

    पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 01 अक्टूबर को रात्रि 09 बजकर 39 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 03 अक्टूबर को रात्रि 12 बजकर 18 मिनट पर होगा। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या 02 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

    यह भी पढ़ें: Sarva Pitru Amavasya 2024: अगर पितृ पक्ष में नहीं किया है तर्पण, तो सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे करें पितरों को प्रसन्न

     ।।पितृ स्तोत्र ।।

    अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

    नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।।

    इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

    सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् । ।

    मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।

    तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

    नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।

    द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

    देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

    अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

    प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।

    योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

    नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

    स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

    सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

    नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

    अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

    अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

    ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय: ।

    जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

    तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस: ।

    नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

    ।।पितृ कवच।।

    पितृ दोष निवारण के लिए इस कवच का रोजाना जाप करना चाहिए।

    कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।

    तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥

    तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।

    तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥

    प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।

    यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥

    उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।

    यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥

    ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।

    अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।

    यह भी पढ़ें: Sarva Pitru Amavasya 2024: सर्वपितृ अमावस्या पर लगाएं ये पेड़-पौधे, पितरों की कृपा से नहीं रहेंगे वंचित

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।