भूत-प्रेत से रक्षा या महाकाली का प्रकटोत्सव? जानिए पश्चिमी भारत की काली चौदस और बंगाल की काली पूजा का सच
बंगाल की काली पूजा और उत्तर व पश्चिम भारत की काली चौदस के बीच के अंतर को समझें। दोनों पर्वों ...और पढ़ें

काली चौदस और काली पूजा में अंतर (Picture Credits- AI Images)
HighLights
काली पूजा कार्तिक अमावस्या पर, काली चौदस चतुर्दशी पर।
बंगाल में काली पूजा, पश्चिम भारत में काली चौदस।
दोनों पर्वों में देवी काली की होती है आराधना।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक महीने की अमावस्या की रात जहां पूरे भारत में दीवाली मनाई जाती हैं, तो वहीं पश्चिम बंगाल में दीवाली की रात काली पूजा भी की जाती है। बंगाली परंपरा में दीवाली को काली पूजा कहकर ही बुलाया जाता है।
दीवाल के दिन बंगाली लोग काली पूजा करते हैं और भाई फोटा की तैयारी में लग जाते हैं। एक खास त्योहार जब बहनें अपने भाइयों को यम से बचाने का विश्वास दिलाती है। बंगाल की काली पूजा और काली चौदस के बीच कोई खास रिश्ता है और क्या ये दोनों एक ही त्योहार हैं आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से?
काली चौदस और काली पूजा के बीच का अंतर?
काली पूजा और काली चौदस एक त्योहार नहीं हैं, भले ही दोनों ही पर्व में देवी काली की आराधना की जाती है।
तिथि और समय का अंतर: उत्तर भारत में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को महाकाली की जयंती यानी 'काली चौदस' के रूप में मनाया जाता है। इसके विपरीत, बंगाल में महाकाली की मुख्य आराधना कार्तिक अमावस्या की रात्रि को की जाती है, जिस दिन शेष भारत में लक्ष्मी पूजन होता है।
इस साल काली चौदस (नरक चतुर्दशी) शनिवार, 7 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। जबकि बंगाल में होनी वाली काली पूजा इस वर्ष रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
अनुष्ठान का आरंभ: बंगाल में कई स्थानों पर चतुर्दशी की रात्रि से ही तांत्रिक अनुष्ठान और दीप प्रज्वलित करने की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है।
मां शक्ति को समर्पित पर्व: बंगाल में दीपावली का संपूर्ण उत्सव धन की देवी लक्ष्मी की तुलना में मां शक्ति महाकाली को मुख्य रूप से समर्पित होता है।
पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि इसी अमावस्या की रात्रि को मां काली ने अत्यंत विकराल रूप धारण करके संसार की दुष्ट शक्तियों से रक्षा की थी।
निशीथ काल पूजन: जिस प्रकार उत्तर भारत में दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा का विधान है, उसी प्रकार बंगाल में मध्य रात्रि (निशीथ काल) में मां काली के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं। इस दौरान तांत्रिक विधि, प्रतीकात्मक बलि और विशेष पूजन संपन्न किया जाता है।
काली चौदस मुख्य रूप से भारत के गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे पश्चिमी भारत में मनाया जाता है। इस दिन मां काली की पूजा-अर्चना के साथ भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने के लिए वीर-वेताल या हनुमान जी की भी पूजा-अर्चना करने की परंपरा निभाई जाती ह। कुछ लोग इस रात को तांत्रिक साधना और शमशान से जुड़े अनुष्ठान में भी शामिल होते हैं।
जबकि काली पूजा पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में बेहद धूमधाम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। इसे वहां मां काली के प्रकटोत्सव या वार्षिक महापर्व के रूप में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है।
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