यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Laddu Gopal: लड्डू गोपाल को हफ्ते में 7 दिन लगाएं ये अलग-अलग भोग, प्रसन्न होंगे प्रभु
कई घरों में लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना और सेवा आदि की जाती है। इसका ख्याल एक बच्चे की तरह ही रखा जाता है कई भक्त हर स्थान पर लड्डू गोपाल को भी अपने सा ...और पढ़ें

HighLights
- भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप हैं लड्डू गोपाल।
- घर के सदस्य की तरह की जाती है इनकी सेवा।
- लड्डू गोपाल को 7 दिन लगाएं अलग-अलग भोग।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Laddu Gopal Bhog: भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को लड्डू गोपाल के रूप में जाना जाता है। कई लोग लड्डू गोपाल जी की सेवा एक बालक के रूप में करते हैं और उन्हें घर का सदस्य मानते हैं। इस रूप में लड्डू गोपाल की एक छोटी-सी प्रतिमा की पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि यदि आप हफ्ते के सातों दिन कान्हा जी को अलग-अलग भोग लगाए जाएं, तो वह अति प्रसन्न होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि हफ्ते में 7 दिन लड्डू गोपाल को किन चीजों का भोग लगाया जा सकता है।
लगाएं ये भोग
- सोमवार - सोमवार के दिन आप लड्डू गोपाल जी को खीर का भोग लगा सकते हैं।
- मंगलवार - मंगलवार के दिन लड्डू गोपाल जी को लाल रंग का कोई फल जैसे सेब, अनार आदि भोग के रूप में अर्पित करना अच्छा माना जाता है।
- बुधवार - बुधवार के दिन आप लड्डू गोपाल जी को साग रोटा का भोग लगा सकते हैं।
- गुरुवार - गुरुवार के दिन गुरुवार कृष्ण जी के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल जी को पीले रंग की मिठाई जैसे लड्डू आदि का भोग लगाएं।
- शुक्रवार - मक्खन गोपाल को अति प्रिय माना गया है। ऐसे में आप शुक्रवार के दिन लड्डू गोपाल जी को माखन-मिश्री का भोग लगा सकते हैं।
- शनिवार - शनिवार के दिन बाल गोपाल जी को तिल, बताशे या फिर खिचड़ी आदि का भोग लगा सकते हैं।
- रविवार - वहीं रविवार के दिन लड्डू गोपाल को पंचामृत का भोग लगाना बेहतर रहेगा। इससे आपके ऊपर भगवान कृष्ण की दया दृष्टि बनी रहेगी।
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भोग लगाने के नियम
सुबह सबसे पहले घंटी बजा कर लड्डू गोपाल को उठाना चाहिए और इसके बाद ही उन्हें भोग लगाना चाहिए। वहीं, दूसरी बार भोग लगाने से पहले लड्डू गोपाल को स्नान कराएं और फिर साफ-सुथरे वस्त्र पहनाएं। ध्यान रहे कि लड्डू गोपाल जी का भोग पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। वहीं, अलग-अलग दिन अलग-अलग तरह का भोग लगाना बेहतर माना जाता है।
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