विज्ञान, दर्शन या धर्मशास्त्र... हर विषय में मेधा बढ़ाएंगे मां सरस्वती के ये चमत्कारी मंत्र
हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है, जिनके मंत्रों का जाप करने से विशेष कृपा मिलती है।

मां सरस्वती के 3 मंत्र

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी सरस्वती को वेदों की माता भी कहा जाता है। मां का स्वरूप निर्मल चांद की तरह जिनके मुख पर दिव्य चमक है। श्वेत और पीत रंग के वस्त्र, उन्हें कमल पर विराजमान और हाथों में वीणा धारण किए दिखाया जाता है।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, जो व्यक्ति नियमित रूप से मां के मंत्रों का जाप सच्चे मन से करता है, उसे देवी सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आज हम आपको देवी सरस्वती के उन खास मंत्रों के बारे में बताएंगे, जिनका जाप करने से आप अपने आपमें बड़ा बदलाव महसूस कर सकेंगे।
सबसे पहले अध्ययन के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मां सरस्वती का एक अलग मंत्र है।
दर्शन, रहस्यवाद या उससे जुड़े विषय
जो व्यक्ति दर्शन, रहस्यवाद या उससे जुड़े किसी भी तरह के विषयों का अध्ययन कर रहा है, उनके लिए यह मंत्र मस्तिष्क में महान विचारों को धारण करने और उन पर सोचने समझने की क्षमता प्रदान करता है। यह मंत्र व्यक्ति की मेधा और बुद्धि दोनों को जागृत करने का काम करता है।
मंत्र- ऊं ब्रह्म ज्ञानायै नम:
अर्थात- मैं ब्रह्मांड में मौजूद उस चेतन बुद्धि की शक्ति को नमन करता हूं। यह मंत्र मां सरस्वती के उस शक्ति रूप को वर्णित करता है, जो खुद ब्रह्मांड की बुद्धि के पीछे मौजूद हैं।

भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान या संबंधित विषय
जो व्यक्ति भौतिकी, अलग-अलग तरह के रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान और इसी तरह के विषयों का अध्ययन करता है, उन्हें मां सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र है- ऊं महा विद्यायै नम:
अर्थात्- महान ज्ञान के पीछे स्थित और उसे उत्पन्न करने वाली शक्ति को नमन। यह मंत्र मां सरस्वती को महान ज्ञान और उसकी अनुभूति के पीछे स्थित शक्ति के रूप में वर्णित करता है।
धार्मिक विषयों से जुड़े लोग
जो लोग धर्म के विचारों और ग्रंथों में गहराई से उतारने की कोशिश करते हैं, जो किसी भी धर्म या संस्कृति के शास्त्रों के गहरे अर्थ को समझने की कोशिश करते हैं, यह मंत्र उनकी बौद्धिक क्षमताओं को भी ज्यादा तेज बनाने का काम करता है।
मंत्र- वेदानां मातरं पश्य मत्सथां देवीं सरस्वती।
अर्थ- देखो, वेदों की माता मां सरस्वती मुझमें निवास करती हैं।
इन तीनों मंत्रों में मां सरस्वती को ब्रह्मांड में मौजूद बुद्धि, महान ज्ञान को उत्पन्न करने वाली शक्ति और अंदर निवास करने वाली वेदों की माता के रूप में पुकारा गया है।
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