यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Sawan somwar 2024: सावन सोमवार पर इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा, बदल जाएगी आपकी किस्मत
हिंदू धर्म में सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में भगवान शिव का अभिषेक करने से वह प्रसन्न हो जाते हैं। साथ ही हर सो ...और पढ़ें

HighLights
- सावन का महीना जल्द शुरू होने वाला है।
- यह महीना महादेव को प्रिय है।
- इस माह में पड़ने वाले सोमवार का व्रत किया जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Sawan Somwar 2024: पंचांग के अनुसार, सावन का महीना 22 जुलाई से शुरू होगा। वहीं, इसका समापन 19 अगस्त को होगा। यह महीना देवों के देव महादेव को बेहद प्रिय है। सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा (Sawan Somwar Puja Vidhi) की जाती है। साथ ही मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मत है कि ऐसा करने से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं और महादेव प्रसन्न होते हैं।
.jpg)
यह भी पढ़ें: Jaya Parvati Vrat 2024: जीवनसाथी के साथ अनबन होगी दूर, जया पार्वती व्रत के दिन करें ये खास उपाय
सावन सोमवार पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन सुबह उठें और दिन की शुरुआत महादेव और मां पार्वती के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान कर वस्त्र धारण करें। सच्चे मन से सूर्य देव को जल अर्पित करें। मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें। अब विधिपूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करें और व्रत का संकल्प लें। अब प्रभु को गंध, पुष्प, धूप, बेलपत्र, अक्षत समेत आदि चीजें अर्पित करें। देशी घी का दीपक जलाकर आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें। साथ ही महादेव के मंत्रों का जप करना फलदायी साबित होता है। इसके पश्चात फल, मिठाई, खीर, हलवा, दही और दूध का भोग लगाएं।
.jpg)
भोग लगाते समय इस मंत्र का करें जाप
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
सावन सोमवार व्रत तिथि
पहला सावन सोमवार व्रत - 22 जुलाई
दूसरा सावन सोमवार व्रत - 29 जुलाई
तीसरा सावन सोमवार व्रत - 5 अगस्त
चौथा सावन सोमवार व्रत - 12 अगस्त
पांचवां सावन सोमवार व्रत - 19 अगस्त
मंगला गौरी व्रत तिथि
पहला मंगला गौरी व्रत - 23 जुलाई
दूसरा मंगला गौरी व्रत - 30 जुलाई
तीसरा मंगला गौरी व्रत - 6 अगस्त
चौथा मंगला गौरी व्रत - 13 अगस्त
यह भी पढ़ें: Mahabharat: कैसे भगवान कृष्ण ने की थी अभिमन्यु पुत्र की रक्षा? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।