हिंदू धर्म के 5 महान बाल भक्त, जिनकी सच्ची भक्ति के आगे भगवान भी हुए नतमस्तक
हिंदू धर्म ग्रंथों में भक्त प्रहलाद, ध्रुव, आरुणि जैसे कई बाल भक्तों का उल्लेख है, जिनकी सच्ची भक्ति और दृढ़ ...और पढ़ें
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हिंदू धर्म से जुड़े 5 बालक भक्त (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों में भक्त प्रहलाद के अलावा भी कई ऐसे बाल भक्त हुए जिनकी सच्ची भक्ति और दृढ़ निश्चय के आगे भगवान को सामने आन ही पड़ा।
इनकी सच्ची भक्ति आज भी सदियों बाद उतनी ही अमर और प्रसांगिक है जितनी कि उस समय रही होगी। आइए जानते हैं हिंदू धर्म से जुड़े ऐसे बाल भक्तों के बारे में जिन्होंने कम उम्र में ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति कर ली थी।
आरुणि
हिंदू धर्म में आरुणि का किस्सा गुरु भक्ति से जुड़ा बेहद सच्चा और ज्ञान भरा किस्सा है। कहा जाता है कि एक बार जोरदार बारिश के दौरान आरुणि से कहा गया कि वह धान के खेत में जाकर देखें कि कहीं पानी मेड़ काटकर खेत से बाहर तो नहीं निकल गया है।
आरुणि खेत पर पहुंचा और मेड़ बनाने के काम में जुट गया। उसके लिए मेड़ बनाना मुश्किल था क्योंकि एक हिस्सा बार-बार पानी में कटकर बह जाता था। खेत से पानी निकलने से रोकने के लिए आरुणि खुद उस हिस्से पर लेट गया जब तक कि वह बारिश बंद नहीं हो गई।
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अष्टावक्र
अष्टावक्र को ज्ञान के सागर के रूप में देखा जाता है। अष्टावक्र की पढ़ाई के प्रति सच्ची निष्ठा और उसके तर्क के आगे अच्छे-अच्छे विद्वान कमजोर नजर आते थे। मात्र 10 साल की उम्र में उन्होंने राजा जनक के प्रिय मंत्री को वाद-विवाद में हरा दिया था।
ध्रुव
विष्णु पुराण में दर्ज एक कथा छोटे से बच्चे की जो अपने ज्ञान और भक्ति के लिए जाना जाता है। जब ध्रुव की सौतेली मां ने उसे पिता की गोद में बैठने नहीं दिया तो निराश होकर ध्रुव को उसकी सगी मां ने ज्ञान की प्राप्ति के लिए विष्णु जी की पूजा करने की सलाह दी। बाद में ध्रुव से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे तारों में सबसे अहम स्थान प्रदान किया।

प्रहलाद
प्रहलाद असुर हिरण्यकशिपु का बेटा था। भगावन विष्णु ने हिरण्यकशिपु के भाई का वध कर दिया था, जिस कारण उसने समस्त जग में विष्णु भक्तों को मारना शुरू कर दिया। उसे जब अपने पुत्र के बारे में यह बात पता चली कि वह विष्णु भक्त है, तो उसे मारने के लिए हिरण्यकशिपु ने कई तरह की कोशिशें की। लेकिन जब उसके पाप का घड़ा भर गया तब स्वयं भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। इसके बाद से प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्तों में से एक बन गया।
नचिकेता
नचिकेता ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। मात्र 8 साल की आयु में उन्हें गुरुकुल भेज दिया गया, जहां उन्होंने शिक्षा-दीक्षा हासिल की। कुछ समय बाद नचिकेता को उनके पिता ने विश्वजीत यज्ञ में सहायता के लिए बुलाया। इस यज्ञ में व्यक्ति अपनी सभी संपत्ति त्याग देता है। यज्ञ शुरू होने के बाद निचकेता के पिता ने बूढ़ी गायों को दे दिया।
उन्हें समझ आ गया कि ऐसी भेंटों से यज्ञ पूरा नहीं होगा। इसलिए उन्होंने अपने पिता से खुद का बलिदान देने को कहा। जब नचिकेता ने अपने पिता से पूछा कि, वे अपने पुत्र का बलिदान किसे देंगे, तो ऋषि वाजश्रवा ने गुस्से में उन्हें यम को अर्पित कर दिया। यमलोक में अपनी सुझ बूझ के बल पर नचिकेता ने यमराज का दिल जीता और बाल भक्तों में से एक बन गया।
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