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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें पूजा, जानिए इसका धार्मिक महत्व

    Updated: Mon, 06 May 2024 03:20 PM (IST)

    अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2024) का दिन बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है। इस बार यह पर्व 10 मई 2024 को मनाय ...और पढ़ें

    Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया पूजा विधि
    Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया पूजा विधि

    HighLights

    1. अक्षय तृतीया हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है।
    2. इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और कुबेर देव की पूजा का विधान है।
    3. अक्षय तृतीया का हिंदू धर्म में बड़ा धार्मिक महत्व है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह दिन सभी शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। इसे लोग आखातीज के नाम से भी जानते हैं। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और कुबेर देव की पूजा का विधान है। अक्षय तृतीया वैशाख माह के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन मनाई जाती है। इस साल यह 10 मई, 2024 को मनाई जाएगी।

    अक्षय तृतीया 2024 पूजा समय

    अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 13 मिनट से सुबह 11 बजकर 43 मिनट तक

    अक्षय तृतीया 2024 का महत्व

    अक्षय तृतीया का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन सबसे पवित्र दिनों में से है, जब लोग विभिन्न धार्मिक और शुभ कार्य करते हैं। अक्षय तृतीया का हिंदू धर्म में बड़ा धार्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस दिन धार्मिक कार्य करते हैं उन्हें सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह दिन सोना, चांदी और आभूषण खरीदने के लिए भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है इससे जीवन में समृद्धि आती हैं।

    अक्षय तृतीया पूजा विधि

    • सुबह उठकर पवित्र स्नान करें और मंदिर की सफाई करें।
    • एक वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
    • चौकी पर मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु, गणेश जी और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें।
    • प्रतिमा को गंगाजल से साफ करें।
    • कुमकुम व चंदन का तिलक लगाएं।
    • फूलों की माला अर्पित करें।
    • खड़े अक्षत, दूर्वा, पान, सुपारी, नारियल,आदि अर्पित करें।
    • फल, मिठाई, मखाने की खीर आदि चीजों का भोग लगाएं।
    • इसके बाद कनकधारा स्तोत्र, विष्णु नामावली, कुबेर चालीसा, गणेश चालीसा का पाठ करें।
    • पूजा को आरती से समाप्त करें।

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