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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Apara Ekadashi 2025: इन आरती से पूर्ण होगी अपरा एकादशी की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

    Updated: Fri, 23 May 2025 07:51 AM (GMT+05:30)

    अपरा एकादशी (Apara Ekadashi 2025) का व्रत ज्येष्ठ मास की एकादशी को रखा जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और भगवान विष् ...और पढ़ें

    Apara Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की आरती।
    Apara Ekadashi 2025: भगवान विष्णु की आरती।

    HighLights

    1. अपरा एकादशी बेहद शुभ मानी जाती है।
    2. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
    3. अपरा एकादशी आज मनाई जा रही है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अपरा एकादशी का व्रत हर साल ज्येष्ठ महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 23 मई, 2025 को यानी आज के दिन रखा जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस व्रत को रखते हैं, उन्हें अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

    वहीं, इस दिन (Apara Ekadashi 2025) नारायण की खास कृपा पाने के लिए उनकी भव्य आरती करनी चाहिए। इससे श्री हरि खुश होते हैं।

    ॥भगवान विष्णु की आरती॥ (Lord Vishnu Aarti)

    ॐ जय जगदीश हरे आरती

    ॐ जय जगदीश हरे,

    स्वामी जय जगदीश हरे ।

    भक्त जनों के संकट,

    दास जनों के संकट,

    क्षण में दूर करे ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    जो ध्यावे फल पावे,

    दुःख बिनसे मन का,

    स्वामी दुःख बिनसे मन का ।

    सुख सम्पति घर आवे,

    सुख सम्पति घर आवे,

    कष्ट मिटे तन का ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    मात पिता तुम मेरे,

    शरण गहूं किसकी,

    स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।

    तुम बिन और न दूजा,

    तुम बिन और न दूजा,

    आस करूं मैं जिसकी ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    तुम पूरण परमात्मा,

    तुम अन्तर्यामी,

    स्वामी तुम अन्तर्यामी ।

    पारब्रह्म परमेश्वर,

    पारब्रह्म परमेश्वर,

    तुम सब के स्वामी ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    तुम करुणा के सागर,

    तुम पालनकर्ता,

    स्वामी तुम पालनकर्ता ।

    मैं मूरख फलकामी,

    मैं सेवक तुम स्वामी,

    कृपा करो भर्ता॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    तुम हो एक अगोचर,

    सबके प्राणपति,

    स्वामी सबके प्राणपति ।

    किस विधि मिलूं दयामय,

    किस विधि मिलूं दयामय,

    तुमको मैं कुमति ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,

    ठाकुर तुम मेरे,

    स्वामी रक्षक तुम मेरे ।

    अपने हाथ उठाओ,

    अपने शरण लगाओ,

    द्वार पड़ा तेरे ॥

    ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

    विषय-विकार मिटाओ,

    पाप हरो देवा,

    स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।

    श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

    श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

    सन्तन की सेवा ॥

    ॐ जय जगदीश हरे,

    स्वामी जय जगदीश हरे ।

    भक्त जनों के संकट,

    दास जनों के संकट,

    क्षण में दूर करे ॥

    ॥एकादशी माता की आरती॥ (Ekadashi Mata Ki Aarti)

    ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।

    विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।

    गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।

    शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।

    शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।

    शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।

    पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।

    नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

    नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।

    देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।

    श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।

    इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।

    रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।

    पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।

    शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

    ॐ जय एकादशी...॥

    जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।

    जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥

    ॐ जय एकादशी...॥

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