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    बुरे दिनों को कहें अलविदा: अपरा एकादशी पर करें ये अचूक उपाय, बरसेगी श्रीहरि की असीम कृपा

    Updated: Wed, 06 May 2026 01:00 PM (IST)

    अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से आराधना करने से अनजाने में किए हुए पापों से मुक्ति मिलती है। ...और पढ़ें

    इस अपरा एकादशी पर करें ये विशेष उपाय, चमक उठेगा भाग्य। Ai Generated Image

    इस अपरा एकादशी पर करें ये विशेष उपाय, चमक उठेगा भाग्य। Ai Generated Image

    HighLights

    1. अपरा एकादशी अपार पुण्य दिलाने वाली तिथि है

    2. इस दिन शंख से अभिषेक करने पर धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं

    3. इस दिन पीली चीजों का दान भाग्य उदय में सहायक होता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अपरा एकादशी अपने नाम की तरह 'अपार' पुण्य प्रदान करने वाली मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे न केवल अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसके जीवन से आर्थिक तंगी और दुर्भाग्य का साया भी हट जाता है। अगर आप भी लंबे समय से परेशान हैं, तो इस पावन तिथि पर किए गए कुछ दुर्लभ उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं। आइए जानते हैं।

    अपरा एकादशी के अचूक और दुर्लभ उपाय

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    दीपदान और तुलसी पूजन

    एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते हुए 11 परिक्रमा करें। मान्यता है कि तुलसी जी की कृपा से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।

    दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक और करें ये खास पाठ

    अगर आपकी आर्थिक उन्नति रुकी हुई है, तो अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु का अभिषेक दक्षिणावर्ती शंख में केसर दूध भरकर करें। श्रीहरि के साथ माता लक्ष्मी का भी अभिषेक करें। इससे दरिद्रता का नाश होता है। साथ ही इस दिन अभिषेक के साथ 'श्री हरि स्तोत्र' का पाठ करना न भूलें।

    पीले फलों और अनाज का दान

    भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को पीले वस्त्र, केले, चने की दाल और केसरिया मिठाई का दान करें। यह उपाय कुंडली में गुरु ग्रह को मजबूत करता है और मान-सम्मान में वृद्धि लाता है।

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    पितृ दोष शांति के लिए

    अपरा एकादशी का व्रत रखने से प्रेत योनि और पितृ दोषों से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और तेल का दीपक जलाएं। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

    ध्यान दें ये बातें

    एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है। मन में सात्विकता बनाए रखें और किसी की निंदा न करें। यह दिन भक्ति का है।

    करें इस स्तोत्र का पाठ

    ।।श्रीहरि स्तोत्र।।

    जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं

    शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं

    नभोनीलकायं दुरावारमायं

    सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ॥

    सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं

    जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं

    गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं

    हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं

    जलान्तर्विहारं धराभारहारं

    चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं

    ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    जराजन्महीनं परानन्दपीनं

    समाधानलीनं सदैवानवीनं

    जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं

    त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    कृताम्नायगानं खगाधीशयानं

    विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं

    स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं

    निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं

    जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं

    सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं

    सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं

    गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं

    सदा युद्धधीरं महावीरवीरं

    महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    रमावामभागं तलानग्रनागं

    कृताधीनयागं गतारागरागं

    मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं

    गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ॥

    फलश्रुति

    इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं

    पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:

    स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं

    जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो ॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताएं गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।