Bhagavad Gita: अशांत मन को शांत करने के लिए अपनाएं श्रीकृष्ण के ये 2 सूत्र
क्या आपका दिमाग भी हमेशा विचारों की भागदौड़ में उलझा रहता है? भगवद्गीता के श्लोक में इस भगवान कृष्ण ने मन को वश में करने के दो चमत्कारी उपाय बताए हैं। ...और पढ़ें

मन शांत करने के दो अचूक उपाय (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में हमारा दिमाग एक ऐसी मशीन बन गया है जो कभी रुकती ही नहीं। रात को सोते समय हो या सुबह उठते ही, विचारों का एक अंतहीन सिलसिला चलता रहता है। इसे ही हम 'रेसिंग थॉट्स' (Racing Thoughts) या विचारों की भागदौड़ कहते हैं। अगर आप भी अक्सर खुद को ओवरथिंकिंग की जाल में फंसा हुआ पाते हैं, तो घबराइए मत, आप अकेले नहीं हैं। हजारों साल पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन भी इसी मानसिक स्थिति (Mental Status) से गुजर रहे थे।
श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय में अर्जुन भगवान कृष्ण से एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल पूछते हैं। अर्जुन कहते हैं कि यह मन इतना चंचल है कि इसे रोकना हवा को मुट्ठी में कैद करने जैसा कठिन है। तब कृष्ण उन्हें वह सूत्र देते हैं, जो आज के समय में किसी भी स्ट्रेस मैनेजमेंट तकनीक (Stress Management Technique) से कहीं ज्यादा कारगर है।
चमत्कारी श्लोक और उसका अर्थ
भगवान कृष्ण भगवद्गीता के अध्याय 6, श्लोक 35 में कहते हैं-
असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् ।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥
जिसका अर्थ है: "हे महाबाहु कुंतीपुत्र! इसमें कोई संदेह नहीं है कि चंचल मन को वश में करना बहुत कठिन है, लेकिन इसे निरंतर अभ्यास (Practice) और वैराग्य (Detachment) के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।"

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मन को शांत करने के दो अचूक हथियार
कृष्ण ने यहां मन को साधने के लिए केवल दो ही रास्ते बताए हैं:
1. अभ्यास (Abhyasa- Constant Practice)
अक्सर हम एक बार ध्यान लगाने बैठते हैं और मन भटकते ही हार मान लेते हैं। अभ्यास का मतलब यह नहीं कि मन भटके ही न, बल्कि इसका मतलब यह है कि जब भी मन बाहर भागे, उसे प्यार से पकड़कर वापस वर्तमान में लाना। जैसे छोटे बच्चे को चलना सिखाया जाता है, वैसे ही मन को बार-बार केंद्रित करने का अभ्यास करना पड़ता है।
2. वैराग्य (Vairagya - Detachment)
वैराग्य का मतलब घर छोड़कर जंगल जाना नहीं है। विभिन्न आध्यात्मिक सूत्रों के अनुसार, आधुनिक संदर्भ में वैराग्य का अर्थ है उन चीजों से मानसिक दूरी बनाना जो आपके नियंत्रण में नहीं हैं। हम अक्सर भविष्य की चिंता या अतीत के पछतावे में उलझे रहते हैं। वैराग्य हमें सिखाता है कि हम अपना काम पूरी ईमानदारी से करें, लेकिन उसके नतीजे या दूसरों की राय से खुद को जरूरत से ज्यादा न जोड़ें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।