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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Chaiti Chhath 2024: चैती छठ के दूसरे दिन किया जाता है खरना, पुण्य फलों की प्राप्ति के लिए जरूर करें ये काम

    Updated: Sat, 13 Apr 2024 02:16 PM (IST)

    साल में दो बार छठ का पर्व मनाया जाता है एक बार कार्तिक माह में और दूसरी बार चैत्र माह में। चैत्र माह में आने वाली छठ को चैती छठ के नाम से जाना जाता है ...और पढ़ें

    Kharna Puja 2024 चैती छठ पर जरूर करें ये काम।
    Kharna Puja 2024 चैती छठ पर जरूर करें ये काम।

    HighLights

    1. चैत्र कृष्ण षष्ठी पर मनाई जाती है चैती छठ।
    2. 12 अप्रैल से हो रही है नहाय खाय की शुरुआत।
    3. चैती छठ को कहा जाता है यमुना छठ।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Kharna Puja 2024 Niyam: प्रत्येक वर्ष चैती छठ की शुरुआत चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि से होती है। ऐसे में इस साल 12 अप्रैल से नहाय-खाय के साथ चैती छठ शुरुआत हो चुकी है। छठ के दूसरे दिन खरना किया जाता है। आइए जानते हैं खरना का शुभ मुहूर्त और सही नियम।

    यमुना छठ शुभ मुहूर्त (Yamuna Chhath 2024 Shubh Muhurat)

    चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 13 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 04 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इसका समापन 14 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 43 मिनट पर होगा। इस दौरान नहाय खाय से लेकर सूर्य अर्घ्य का समय कुछ इस प्रकार रहेगा -

    • नहाय खाय - 12 अप्रैल 2024, शुक्रवार
    • खरना - 13 अप्रैल 2024, शनिवार
    • संध्या अर्घ्य - 14 अप्रैल 2024, रविवार
    • सूर्य अर्घ्य - 15 अप्रैल 2024, सोमवार

    खरना का महत्व

    मान्यता के अनुसार, छठ पूजा और व्रत करने से साधक के साथ-साथ परिवार में भी खुशहाली, स्वास्थ्य और संपन्नता बनी रहती है। हालांकि चार दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान की कुछ चीजें बेहद कठिन होती हैं। इस दौरान 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। शास्त्रों में खरना का अर्थ शुद्धिकरण बताया गया है।

    कैसे किया जाता है खरना

    छठ के दूसरे दिन यानी खरना पर सुबह से लेकर शाम तक उपवास किया जाता हैं। इसके बाद शाम के समय छठी मैया के लिए पूजा का प्रसाद यानी खीर तैयार की जाती है। इसके बाद फिर से निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।

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    इन बातों का रखें ख्याल

    खरना का प्रसाद बनाते समय शुद्धता का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है। ऐसे में बिल्कुल साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर ही प्रसाद बनाना चाहिए । इस बात का भी ध्यान रखें कि पूजा में उन बर्तनों का इस्तेमाल न करें जिनका पहले इस्तेमाल किया गया हो। इसके साथ ही बनाए गए प्रसाद को जरूरतमंद लोगों के बीच भी बांटना चाहिए। इससे पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

    डिसक्लेमर: 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।'