चैत्र नवरात्र 2026: कलश स्थापना और अखंड ज्योति के लिए अपनाएं ये 5 वास्तु नियम
नवरात्र में कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इन्हें सही दिशा में रखने से ही पूजा का पूर्ण फल मिलता है और ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
भानुप्रिया मिश्रा, एस्ट्रोपत्री। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाना बहुत ही पवित्र माना जाता है। वास्तु के अनुसार, कलश को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर स्थापित करना चाहिए।
इसी तरह, अखंड ज्योति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने से घर में सुख-समृद्धि आने की संभावना बढ़ती है। घी का दीपक जलाना वातावरण की शुद्धि के लिए श्रेष्ठ है। इन नियमों का पालन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आपकी बड़ी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह अनुशासन आपके जीवन को सही मार्ग पर ले जाता है।
कलश स्थापना का आध्यात्मिक और वास्तु महत्व
कलश को शास्त्रों में ब्रह्मांड का प्रतीक और समस्त देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। वास्तु के अनुसार, कलश स्थापना के लिए उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) सबसे श्रेष्ठ है। यह दिशा जल तत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा की स्वामी है, इसलिए यहां कलश रखने से घर में पवित्रता का संचार होता है।
कलश स्थापित करते समय ध्यान रखें कि स्थान पूरी तरह स्वच्छ हो। कलश को सीधे भूमि पर रखने के बजाय लकड़ी की चौकी या आसन पर रखना चाहिए। कलश में भरा शुद्ध जल जीवन की जीवंतता को दर्शाता है, जबकि उसके ऊपर रखे आम के पत्ते और नारियल प्रकृति के प्रति हमारे समर्पण और सुख-समृद्धि का प्रतीक हैं। इसमें एक सिक्का, सुपारी और अक्षत डालना जीवन में स्थिरता लाने वाला माना जाता है।
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अखंड ज्योति जलाने के नियम
अखंड ज्योति को ईश्वरीय प्रकाश का रूप माना जाता है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का मार्ग बताती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अखंड ज्योति का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा में मुख होने से स्वास्थ्य और आयु बढ़ती है, वहीं उत्तर दिशा में होने से धन और समृद्धि का आगमन होने की संभावना रहती है।
ज्योति जलाने के लिए गाय का शुद्ध घी सबसे उत्तम है, क्योंकि यह वातावरण को शुद्ध कर सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार करता है। नहीं तो तिल के तेल का प्रयोग किया जा सकता है। अखंड ज्योति के लिए एक सुरक्षित स्थान चुनें जहां हवा का तेज बहाव न हो, ताकि ज्योति बिना किसी बाधा के निरंतर जलती रहे। दीपक के नीचे एक छोटी थाली या प्लेट जरूर रखें ताकि पूजा का स्थान साफ-सुथरा बना रहे।
सामान्य गलतियां और वास्तु लाभ
अक्सर लोग पूजा स्थान के पास गंदगी या भारी सामान रख देते हैं, जिससे ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। कलश और अखंड ज्योति के आसपास जूते-चप्पल या फालतू सामान बिल्कुल न रखें, नहीं तो स्थान की पवित्रता कम हो सकती है। शांत और स्वच्छ वातावरण में की गई पूजा ही मन को शांति प्रदान करती है और मानसिक संतुलन बनाए रखती है।
जब हम सही विधि और वास्तु नियमों का पालन करते हैं, तो परिवार के सदस्यों के बीच आपसी समझ और प्रेम बढ़ता है। घर से नकारात्मक शक्तियां दूर होने लगती हैं और एक दिव्य शांति का अनुभव होता है। यह व्यवस्थित तरीका आपके जीवन को सही दिशा में ले जाने में मदद करता है और आपकी इच्छाएं पूरी करने का आशीर्वाद देता है।
अंकज्योतिष विशेषज्ञ: भानुप्रिया मिश्रा, Astropatri.com, फीडबैक के लिए लिखें: hello@astropatri.com