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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Chandra Darshan 2025: अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन क्यों है जरूरी, जानें इस दिन क्या करें क्या नहीं

    Updated: Tue, 27 May 2025 04:22 PM (IST)

    पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि अमावस्या कहलाती है। इसके अगले दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व माना गया है। इस साल ज्ये ...और पढ़ें

    Chandra Darshan 2025 चंद्र दर्शन के दिन क्या करें क्या नहीं?
    Chandra Darshan 2025 चंद्र दर्शन के दिन क्या करें क्या नहीं?

    आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। पुराणों में चंद्र देव को सुंदरता, शीतलता और मन की शांति देने वाले पूजनीय देवता माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं के संचालनकर्ता होते हैं। इसलिए जब चंद्रमा का दर्शन पहली बार अमावस्या के बाद होते हैं, तो वह दिन ‘चंद्र दर्शन’ कहलाता है और यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

    इस साल ‘चंद्र दर्शन’ ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर 28 मई बुधवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन की विशेष मान्यता है, क्योंकि चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक शांति, सौंदर्य, आकर्षण और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

    चंद्र दर्शन का महत्व (Chandra Darshan Significance)

    धर्मिक धर्म में चंद्र दर्शन को ज्ञान का प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में भी चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, चंद्र देव मन के कारक हैं। चंद्र दर्शन के दौरान चंद्र देव की पूजा करने का भी विधान है।

    ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के बाद किए गए चंद्र दर्शन से साधक को जीवन में अच्छे परिणा मिल सकते हैं। कई जातक इस दिन उपवास भी करते हैं और रात को चन्द्र दर्शन करके चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद अपना उपवास खोलते हैं।

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    चन्द्र दर्शन का समय और अवधि:-

    चन्द्र दर्शन का समय - शाम 7 बजकर 12 बजे से रात्रि 8 बजकर 53 बजे तक

    चन्द्र दर्शन की अवधि - 1 घंटा 40 मिनट

    इस दिन क्या करें-

    • चंद्र देव का ध्यान करें और उन्हें कच्चा दूध, सफेद फूल और चावल अर्पित करें।
    • "ॐ चं चंद्राय नमः" मंत्र का जप करें।
    • चंद्रमा को देख कर जल अर्घ्य दें और मन की शुद्धि के लिए प्रार्थना करें।
    • सफेद वस्त्र पहने और हल्का, सात्विक भोजन करें।

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    इस दिन क्या न करें-

    • तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन न करें।
    • मन में नकारात्मक विचार न आने दें, क्रोध और कलह से बचें।
    • चंद्र दर्शन के दिन झूठ बोलना और अपवित्रता से बचना चाहिए।

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