चंद्र ग्रहण 2026: क्या ग्रहण काल में यात्रा कर सकते हैं? पढ़ें जरूरी नियम और सावधानियां
हिंदू धर्म में ग्रहण काल को अशुभ समय का संकेत माना जाता है लेकिन क्या इस दौरान यात्रा करने से ...और पढ़ें
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ग्रहण काल में बाहर यात्रा करना कितना सही? (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में ग्रहण काल (सूर्य और चंद्र ग्रहण) को अशुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान आसपास के वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी बढ़ जाता है, जो व्यक्ति की ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है। साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन यानी आज लगने जा रहा है, जो कि एक आंशिक चंद्र ग्रहण है।
वैसे तो ग्रहण काल के दौरान कई तरह की बातों का ध्यान रखा जाता है। इसमें धार्मिक कर्मकांड न करने से लेकर खाना बनाने तक शामिल है। लेकिन क्या ग्रहण काल के दौरान यात्रा करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से इसके पीछे का सच।
चंद्र ग्रहण के साए के साथ रक्षाबंधन का पर्व
आज आखिरी चंद्र ग्रहण के साथ-साथ रक्षाबंधन का पर्व भी है। जहां एक तरफ रक्षाबंधन का पर्व हिंदू धर्म में भाई-बहन के प्यार और पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर हिंदू धर्म में ग्रहण काल को अति संवेदनशील समय माना जाता है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि, आज चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा और न ही सूतक काल लगेगा। इस हिसाब से चंद्र ग्रहण वाले दिन भारत में रक्षाबंधन का पर्व खुशी-खुशी मनाया जा सकेगा।

ग्रहण काल में यात्रा करना शुभ या अशुभ?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता है। शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है और वातावरण में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है।
यात्रा न करने के मुख्य कारण
स्वास्थ्य पर प्रभाव: ग्रहण के समय निकलने वाली किरणें और सूक्ष्म तरंगें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
विघ्न का जोखिम: पारंपरिक नजरिए से इस समय एकाग्रता में कमी और भ्रम की स्थिति बनने के कारण यात्रा में विघ्न या रुकावट का जोखिम माना जाता है।
यात्रा करना जरूरी हो तो इन नियमों का रखें खास ध्यान
यदि ग्रहण के दौरान यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो जाए, तो निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए-
तुलसी के पत्ते का प्रयोग: यात्रा पर निकलने से पहले मुख में तुलसी का पत्ता रखें।
इष्ट देव का ध्यान: यात्रा के दौरान मन ही मन अपने इष्ट देव के मंत्रों (जैसे महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय') का जाप करते रहें।
भोजन और जल से बचाव: ग्रहण काल के दौरान यात्रा करते समय खुली जगह पर कुछ भी खाने या पीने से बचें। पहले से रखे पानी या भोजन में तुलसी दल डालकर ही प्रयोग करें।
सूर्य/चंद्र दर्शन से बचें: यात्रा के दौरान सीधी धूप या ग्रहण युक्त चंद्रमा को देखने से बचें।
ग्रहण समाप्ति के बाद दान: यात्रा पूरी होने या ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और क्षमतानुसार अनाज, वस्त्र या तिल का दान करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
