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चारधाम यात्रा का शंखनाद: गंगोत्री-यमुनोत्री के खुले कपाट, बाबा केदार के दर्शन के लिए करना होगा बस थोड़ा और इंतजार

Published: Sun, 19 Apr 2026 01:30 PM (IST)

अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए हैं। आइए यहां बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की डेट जानते हैं।

Chardham Yatra Open Date: शुरू हुई उत्तराखंड की चारधाम यात्रा। (Ai Generated Image)

Chardham Yatra Open Date: शुरू हुई उत्तराखंड की चारधाम यात्रा। (Ai Generated Image)

HighLights

  1. अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए हैं

  2. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अभी समय है


  3. कपाट खुलने के बाद कई पारंपरिक वैदिक प्रक्रियाएं की गईं

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड की पहाड़ियों में शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां गंगा और मां यमुना के धामों गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट आज सुबह शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलते ही हजारों भक्तों ने मां के दर्शन कर अक्षय पुण्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।

अगर आप इस पवित्र यात्रा में शामिल नहीं हो पाए हैं, तो भी आप घर बैठे इन धामों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन कुछ नियमों का ध्यान रखना होगा आइए उनके बारे में जानते हैं।

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कब खुलेंगे केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट?

वैदिक पंचांग को देखते हुए 22 अप्रैल, 2026 को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। वहीं, 23 अप्रैल, 2026 को बद्रीनाथ धाम के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।

गंगोत्री और यमुनोत्री का धार्मिक महत्व

यमुनोत्री: मोक्ष की पहली सीढ़ी

चारधाम यात्रा की शुरुआत पारंपरिक रूप से यमुनोत्री से होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमुना जी सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति यमुनोत्री के शीतल जल में स्नान करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और यम की प्रताड़ना से मुक्ति मिलती है।

गंगोत्री: पापों का नाश

गंगोत्री वह स्थान है जहां भगीरथ जी की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगोत्री की पावन धारा में स्नान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और उसे मानसिक शांति मिलती है।

घर बैठे कैसे प्राप्त करें इन धामों की कृपा?

  • सुबह स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएं और 'गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु' मंत्र का जाप करें। मन में यह भाव रखें कि आप साक्षात उत्तरकाशी की पावन धाराओं में स्नान कर रहे हैं।
  • इन धामों की प्रतिमा का दर्शन करें और उनकी विधिवत पूजा करें।
  • इस दिन घर पर बैठकर 'गंगा अष्टकम' या 'यमुना अष्टकम' का पाठ करना बहुत फलदायी होता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • अक्षय तृतीया का संयोग होने से इस दिन किसी गरीब को जल का घड़ा, सत्तू या फल दान करें।
  • ज्यादा से धार्मिक काम करें और तामसिक चीजों से दूर रहें।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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