मिट्टी का हाथी, जगमगाते दीये और गन्ने का मंडप... मन्नत पूरी होने पर छठ में क्यों भरते हैं कोसी?
छठ पूजा में कोसी पूजा का विशेष महत्व है, जो मन्नत पूरी होने पर छठी मैया और भगवान सूर्य के ...और पढ़ें

कोसी भरते समय न करें गलतियां (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मन्नत पूरी होने पर छठी मैया को धन्यवाद देने हेतु।
गन्ने का मंडप, मिट्टी का हाथी और दीये सजाए जाते हैं।
संतान की प्राप्ति और उनकी तरक्की के लिए की जाती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। इस 4 दिन के पर्व के दौरान कई खास परंपराएं निभाई जाती हैं। इन्हीं में शामिल है कोसी पूजा (कोसी भरना)। यह रस्म मुख्य रूप से मन्नत पूरी होने पर छठी मैया और भगवान सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने के लिए निभाई जाती है।
छठ पूजा के तीसरे दिन जब डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, तो घाट पर कोसी सजाई जाती है, जिसमें गन्ने का मंडप, मिट्टी का हाथी और जगमगाते दीये मुख्य रूप से शामिल होते हैं। यह जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर छठ पूजा में कोसी भरना क्या होता है? आइए इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
कोसी पूजा का धार्मिक महत्व
- ऐसा माना जाता है कि जब किसी की कोई मन्नत पूरी हो जाती है, तो छठी मैया को धन्यवाद देने के लिए छठ पूजा के दौरान कोसी भरी जाती है।
- कोसी भरने के लिए 4, 5, 7 या 11 गन्नों को एक साथ बांधकर एक मंडप बनाया जाता है। इस मंडप को मंदिर और यज्ञ का प्रतीक माना जाता है।
- मंडप के बीच मिट्टी से बना एक हाथी रखा जाता है, जिसे सुख-समृद्धि, शक्ति और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
- हाथी पर दीपक बने हुए होते हैं। पूजा के दौरान इन दीपकों को जलाया जाता है। मंडप में प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू, केला, नारियल, गन्ना और अन्य मौसमी फल रखने का विधान है।
कोसी भरने के नियम
- कोसी पूजा मुख्य रूप से संतान की प्राप्ति और उनकी तरक्की के लिए की जाती है।
- संध्या अर्घ्य वाले दिन शाम को घर पर कोसी सजाई जाती है। रात भर महिलाएं इसके पास बैठकर छठी मैया के पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और जागरण करती हैं, जिसे 'कोसी सेवना' कहा जाता है।
- इसके बाद सप्तमी तिथि पर यानी उगते सूर्य को अर्घ्य देने के समय कोसी को घाट पर ले जाया जाता है।
- पूजा-अर्चना करने के बाद मिट्टी के हाथी को पवित्र नदी या जल में विसर्जित कर दिया जाता है।
कोसी भरने के दौरान न करें ये गलतियां
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कोसी भरते समय गंदगी न रखें, टूटे गन्ने या खंडित कलश का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। रात भर दीये बुझने न दें, और पूजा में शुद्ध, बिना दाग वाले फलों का ही उपयोग करें।
इस दिन से शुरू होगी छठ पूजा
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में छठ पूजा का पर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा।
13 नवंबर: नहाय-खाय
14 नवंबर: खरना
15 नवंबर: संध्या अर्घ्य
16 नवंबर: उषा अर्घ्य
यह भी पढ़ें- सिर्फ कार्तिक नहीं, चैत्र में भी पुकारती हैं छठी मइया: पढ़िए 4 दिन के इस सबसे बड़े पर्व की महिमा
यह भी पढ़ें- छठ पूजा पर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य क्यों दिया जाता है? परंपरा में छुपा है गहरा रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।