छठ पर 7 घोड़ों के रथ पर आते हैं सूर्य देव, क्या है इस 'सात' नंबर का असली रहस्य?
सूर्य देव के रथ को खींचने वाले सात घोड़ों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो छठ पूजा के ...और पढ़ें

छठ पर सूर्य देव के सात घोड़ों का महत्व
HighLights
सूर्य देव के रथ को सात घोड़े खींचते हैं।
ये घोड़े सात दिनों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा दर्शाते हैं।
इनका संबंध सात चक्रों और रंगों से भी है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल छठ का त्योहार 13 नवंबर से लेकर 16 नवंबर 2026 तक मनाया जाएगा। इस त्योहार को मनाने वाले लोग छठ के मौके पर छठी मैय्या के साथ सूर्य देवता को पूजते और अर्घ्य देते हैं। हिंदू धर्म में सूर्य देव की महिमा बेहद खास बताई है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, छठ के दौरान भगवान सूर्य देव 7 घोड़े पर सवार होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए आते हैं।
हिंदू धर्म में भगवान सूर्य का वाहन सात घोड़ों द्वारा चलाए जाने वाला रथ है। वे सात विशाल एवं शक्तिशाली घोड़ों पर सवार होते हैं। इन घोड़ों की लगाम अरुण देव के हाथों में होती है और खुद सूर्य देवता पीछे रथ पर विराजमान रहते हैं।

सात घोड़े ही क्यों?
कई बार अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि, सूर्य देव हमेशा सात घोड़ों की सवारी क्यों करते हैं? उससे ज्यादा या कम क्यों नहीं? दरअसल संख्या सात के पीछे खास करण है। दरअसल सूर्य भगवान से जुड़ी एक खास कथा यह भी है कि, उनके करीब 11 भाई हैं, जिन्हें एकत्रित रूप में आदित्य कहा जाता है।
यही वजह है कि सूर्य देव को आदित्य के नाम से भी जाना जाता है।
दरअसल सूर्य भगवान के रथ को चलाने वाले इन सात घोड़ों के नाम हैं, गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति। माना जाता है कि सूर्य देव के ये सात घोड़े सात दिनों को ढकेलते हैं। इसके अलावा ये सात संख्या हिंदू दर्शन और आध्यात्मिक परंपराओं में खास माने जाते हैं। उदाहरण के लिए-
- सात चक्र
- सप्तर्षि
- सात पवित्र नदियां
- सप्त द्वीप
- सप्त स्वर
- यज्ञ की सात ज्वालाएं
- विवाह के सात फेरे
वैदिक परंपरा में सूर्य देव के घोड़ों को संपूर्ण दिव्य ऊर्जा का प्रतिनिधित्व भी माना जाता है, जो ब्रह्मांड को संचालित करती है। आधुनिक समय में इन सात घोड़ों को अक्सर रोशनी के सात रंगों से भी जोड़कर देखा जाता है। बैंगनी, नील, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल।
हालांकि सूर्य देव सात घोड़ों को पारंपरिक रूप से सफेद रंग में दिखाया जाता है। सूर्य देव का सफेद घोड़ा भक्तों को यह संदेश देता है कि, संसार भले ही अनेक रूपों और रंगों में दिखाई देता हो, लेकिन उसका अंतिम स्रोत एक जैसा ही है।
कई आध्यात्मिक परंपराओं में सूर्य देव के सात घोड़ों को मानव शरीर के सात चक्रों से भी जोड़कर देखा जाता है। जिस तरह से सूर्य की रोशनी बाहरी जीवन को ऊर्जा देने का काम करती है, उसी तरह से आध्यात्मिक जागरण भी हमारे अंदर आत्मस्वरूप को प्रकाशित करता है।
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