आखिरी 5 मिनट: मौत के ठीक पहले इंसान की आंखों के सामने क्या आता है?
मृत्यु के आखिरी 5 मिनट में आत्मा को क्या दिखता है? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं।

जीवन का अंतिम क्षण: मृत्यु से 5 मिनट पहले इंसान को क्या दिखाई देता है?
HighLights
अंतिम समय में व्यक्ति को अपने वे पूर्वज दिखाई देने लगते हैं
पांचों इंद्रियां काम करना बंद कर देती हैं
मृत्यु के अंतिम क्षणों में व्यक्ति की सांसें भारी होने लगती हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु यात्रा को आत्मा के एक शरीर से दूसरे शरीर में जाने का समय माना जाता है। गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है कि मृत्यु के आखिरी 5 मिनटों में इंसान की आंखों के सामने क्या आता है और आत्मा को किन-किन चीजों का सामना करना पड़ता है? आइए यहां इस आर्टिकल में जानते हैं।

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कर्मों का लेखा-जोखा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब व्यक्ति की सांसें टूटने वाली होती हैं, तो जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों की पूरी चीजें उसकी आंखों के सामने घूम जाती है। इंसान ने कब किसे सुख दिया और कब किसका दिल दुखाया, ये सब कुछ मिनटों में साफ दिखने लगता है। इस समय पश्चाताप की भावना सबसे प्रबल होती है।
दिव्य दर्शन
- गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के अंतिम क्षणों में व्यक्ति की सांसें भारी होने लगती हैं और उसकी बोलती बंद हो जाती है। वह चाहकर भी अपने परिवार वालों से बात नहीं कर पाता, क्योंकि उसे सांसारिक दृष्टि के बजाय दिव्य दृष्टि मिल जाती है।
- बुरे कर्म करने वालों को भयानक यमदूत नजर आते हैं, जिन्हें देखकर मरता हुआ व्यक्ति डर जाता है।
- अच्छे कर्म करने वालों को भगवान विष्णु के दूत या दिव्य प्रकाश दिखाई देता है, जिससे उन्हें असीम शांति का अनुभव होता है।
धार्मिक दृष्टि से अंतिम क्षणों में होने वाले बदलाव
- पांचों इंद्रियां काम करना बंद कर देती हैं। सांसारिक मोह-माया से ध्यान पूरी तरह टूट जाता है।
- पूर्वज आत्मा का स्वागत करने के लिए अदृश्य रूप में सामने आते दिखाई देते हैं।
- अंतिम समय में आत्मा शरीर के नौ द्वारों में से किसी एक से निकलने के लिए तैयार होती है।
पूर्वजों और देवी-देवताओं के दर्शन
सनातन धर्म में माना जाता है कि अंतिम समय में व्यक्ति को अपने वे पूर्वज दिखाई देने लगते हैं। वे आत्मा को आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद देने आते हैं। इसके अलावा, व्यक्ति जिस भी इष्टदेव की पूजा जीवनभर करता है, उसकी छवि आंखों के सामने आती है।
गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य अंत समय में जिस भाव का ध्यान करते हुए शरीर छोड़ता है, वह उसी गति को प्राप्त होता है। इसलिए सनातन परंपरा में मृत्यु के समय 'राम नाम' या ईश्वर के नाम जप का विशेष महत्व बताया गया है, ताकि आत्मा बिना भटके सद्गति को प्राप्त कर सके।
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