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    25 जुलाई से क्यों लग रहा है शुभ कार्यों पर 4 महीने का 'ब्रेक'? धर्म के साथ विज्ञान से भी समझें कारण

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 09:00 AM (IST)

    देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को है, जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिससे चातुर्मास का आरंभ होता है। इस दौरान सभी शुभ कार ...और पढ़ें

    25 जुलाई 2026 से लग रहा है चातुर्मास का महीना

    25 जुलाई 2026 से लग रहा है चातुर्मास का महीना

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्रों में आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी, हरिशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी और आषाढ़ी एकादशी जैसे कई नामों से जाना जाता है। धार्मिक मत है कि, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 महीने के लिए योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं, जिसके के बाद चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है, जो चार महीनों तक चलता है। इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को है।

    ऐसे में 25 जुलाई से आने वाले 4 महीने के लिए सभी तरह के शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समेत अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। चातुर्मास के 4 महीनों में जप-तप, दान, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है।

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, देवशयनी एकादशी केवल भगवान के सोने का दिन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य को विश्राम और आत्ममंथन का संदेश देती है। जब जगत का स्वामी ठहरता है, तो हमें भी अपनी भागदौड़ रोककर भक्ति में लीन होना चाहिए।

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    शंखासुर वध और योगनिद्रा का धार्मिक संबंध

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष तिथि का संबंध भगवान विष्णु के एक महान युद्ध और उसके बाद विश्राम की कथा से है। भगवान विष्णु शंखासुर नामक दैत्य का वध करने के बाद थककर चार महीने के लिए क्षीरसागर में सो जाते हैं।

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    भगवान के इस शयन काल को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है, जिसके बाद से पूरे चार महीनों के लिए सृष्टि के संचालन की गति बदल जाती है और सांसारिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संयमित जीवन

    धार्मिक कथाओं के साथ-साथ इस समय का एक बहुत बड़ा मौसमी महत्व भी बताया गया है:

    वर्षा ऋतु का समय: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं।

    संयम की आवश्यकता: इस मौसम में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इन चार महीनों में व्रत रखने और बेहद संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि स्वास्थ्य ठीक रहे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।