Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कुंभाभिषेक क्यों है इतना खास? जानिए इसका महत्व और नियम

    Updated: Mon, 11 May 2026 01:42 PM (IST)

    सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में होने वाले कुंभाभिषेक का क्या महत्व है? आइए यहां इस दिव्य अनुष्ठान के बारे में विस्तार से जानते हैं। ...और पढ़ें

    कुंभाभिषेक से कैसे जागृत होती है दैवीय ऊर्जा? जानें सब कुछ

    कुंभाभिषेक से कैसे जागृत होती है दैवीय ऊर्जा? जानें सब कुछ

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, भगवान सोमनाथ का मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा का पुंज भी है। यहां समय-समय पर कई दिव्य और भव्य अनुष्ठान होते हैं। एक बार फिर सोमनाथ की नगरी एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव का साक्षी बनी है। दरअसल, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मंदिर में कुंभाभिषेक किया गया है, जिसका हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बनें। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि कुंभाभिषेक क्या होता है और मंदिरों में इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

    WhatsApp Image 2026-05-11 at 1.12.19 PM

    क्या है कुंभाभिषेक?

    कुंभाभिषेक दो शब्दों से मिलकर बना है कुंभ यानी कलश और अभिषेक यानी पवित्र स्नान। शास्त्रों के अनुसार, मंदिर के शिखर और मुख्य मूर्ति को पवित्र नदियों के जल, औषधियों और मंत्रोच्चार के साथ फिर ऊर्जा से भरने करने की प्रक्रिया को कुंभाभिषेक कहा जाता है। सोमनाथ जैसे जाग्रत ज्योतिर्लिंग में इसे मंदिर की दिव्यता को अखंड रखने का माध्यम माना जाता है।

    इसका आध्यात्मिक महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समय बीतने के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा कम हो जाती है। कुंभाभिषेक के माध्यम से उस दिव्य ऊर्जा को फिर स्थापित किया जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए किया जाने वाला भव्य अनुष्ठान है। माना जाता है कि जब शिखर के कुंभ पर पवित्र जल चढ़ाया जाता है, तो उसकी बूंदें जहां तक जाती हैं, वह क्षेत्र रोग-दोष से मुक्त हो जाता है। इसके साथ ही हर तरह की नकारात्मकता का नाश होता है।

    कुंभाभिषेक के नियम

    • मुख्य अभिषेक से पहले भगवान के विग्रह और कलश को जल, अन्न और पुष्पों में रखा जाता है।
    • मंदिर परिसर में विशाल यज्ञशाला बनाई जाती है, जहां कई दिनों तक वेदमंत्रों का पाठ और हवन होता है।
    • गंगा, यमुना, सरस्वती सहित सप्त नदियों के जल को कलशों में अभिमंत्रित किया जाता है।
    • शुभ मुहूर्त में मंदिर के स्वर्ण शिखर पर स्थित कलशों पर पवित्र जल अर्पित किया जाता है। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठता है।

    कुंभाभिषेक के लाभ

    जो भक्त इस अनुष्ठान के साक्षी बनते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है। साथ ही दरिद्रता का नाश होता है और कोराबार, सेहत में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसके अलावा भोलेनाथ की कृपा भी मिलती है।

    खबरें और भी

     यह भी पढ़ें: राहु का साया या पितरों की नाराजगी? खाने में बार-बार निकल रहा है बाल, समझ लें शुरू होने वाले हैं बुरे दिन

    यह भी पढ़ें:  ज्येष्ठ माह में बन रहा 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग, डायरी में अभी नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।