दीवाली की आधी रात को ही क्यों भ्रमण करती हैं मां लक्ष्मी? चौंका देगा 'निशीथ काल' की पूजा का चमत्कारी रहस्य
दीवाली की रात निशीथ काल में माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष ...और पढ़ें

दीवाली की रात निशीथ काल में लक्ष्मी पूजा का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
दीवाली की रात निशीथ काल में लक्ष्मी भ्रमण।
मध्यरात्रि 11:30 से 12:30 बजे तक शुभ समय।
लक्ष्मी साधना और मंत्र जाप से विशेष कृपा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार माता लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि की कामना का पर्व होता है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। वहीं दीवाली की आधी रात को भी माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की इस पावन रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इसी कारण निशीथ काल को लक्ष्मी साधना और विशेष मंत्र जाप के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों में इसे महानिशा भी कहा जाता है।
आखिर क्या है निशीथ काल, इस दौरान पूजा करने का क्या महत्व है और क्यों इसे मां लक्ष्मी की कृपा पाने का विशेष समय माना जाता है? आइए, एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से जानते हैं इसका धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य।
दीवाली की रात निशीथ काल का क्या महत्व है?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, शास्त्रों में रात के चार प्रहरों में से मध्य रात्रि के समय को निशीथ काल कहा जाता है। दीवाली की रात को सनातन परंपरा में कालरात्रि या महानिशा की संज्ञा दी गई है।
शास्त्रों और ज्योतिष में इस अवधि का विशेष महत्व होता है। दीवाली की रात इस समय पर की गई पूजा विशेष रूप से माता लक्ष्मी को स्वीकार्य होती है।
निशीथ काल का समय और स्वरूप
समय सीमा: एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, निशीथ काल आमतौर पर रात्रि के लगभग 11:30 बजे से लेकर 12:30 बजे मध्य रात्रि के बीच का समय होता है। यह वह पावन समय माना जाता है जब संपूर्ण सृष्टि में एक विशेष प्रकार की अलौकिक ऊर्जा व्याप्त होती है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
मां लक्ष्मी का पृथ्वी भ्रमण: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात निशीथ काल में ही देवी लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं। यही कारण है कि साधक और गृहस्थ इस समय मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीपक प्रज्वलित करते हैं और उनके विशेष मंत्रों का जप करते हैं।
साधना और सिद्धि की रात: शास्त्रों के अनुसार, महानिशा की यह रात मां काली और महासरस्वती की साधना के लिए अत्यंत दुर्लभ और उत्तम मानी जाती है। तंत्र शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि इस विशिष्ट काल में की गई किसी भी साधना, मंत्र जाप या स्तोत्र पाठ का फल साधारण समय की तुलना में कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।
अगर आप भी दीवाली की रात निशीथ काल में माता लक्ष्मी की पूजा करेंगे, तो साल भर उनकी कृपा दृष्टि बनी रहेगी।
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