यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
धन से उत्तम ज्ञान
ज्ञान धन से कहीं अधिक उत्तम होता है। धन को कोई भी चुरा सकता है लेकिन ज्ञान को कोई चुरा ...और पढ़ें

पानीपत। ज्ञान धन से कहीं अधिक उत्तम होता है। धन को कोई भी चुरा सकता है लेकिन ज्ञान को कोई चुरा नहीं सकता। यह बात कुटानी रोड स्थित अवधधाम मंदिर में बुधवार को भागवत कथा सुनाते हुए पंडित राधे राधे ने कही।
उन्होंने कहा कि धन की रक्षा मानव को स्वयं करनी पड़ती है। ज्ञान स्वयं मानव की रक्षा करता है। धन की रक्षा के लिए ज्ञान व बुद्धि चाहिए, वरना दुराचारी व बलशाली लोग धन का गबन कर लेंगे। बिना ज्ञान के तो बल भी व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के बिना सब कुछ व्यर्थ होता है। गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता। ज्ञान के लिए गुरु की तलाश रखनी चाहिए। गुरु की प्राप्ति के लिए सत्संग जरूरी है। सत्संग के बिना गुरु की प्राप्ति संभव नहीं होगी। गुरु के मार्गदर्शन में प्रत्येक व्यक्ति जीवन को सार्थक बना सकता है। गुरु ज्ञान के भंडार होते हैं। दुराचार व अनाचार से जो प्रभु की भक्ति की ओर ले जाए वह गुरु होते हैं। बिना गुरु के भव सागर से पार नहीं पा सकते। पंडित दाऊजी महाराज के सान्धि्य में विद्वान ब्राह्माणों ने सर्व देव पूजन, व्यास पूजन, मंगल कलश पूजन व नवग्रह पूजन किया। कथा में आए अतिथियों को सम्मानित किया गया।
