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    Falgun Purnima 2026: ग्रहण के दौरान स्नान-दान का फल कैसे पाएं? नोट कर लें सूतक की टाइमिंग

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 02:11 PM (GMT+05:30)

    साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जानें सूतक काल का सही समय, पूजा के नियम और स्नान-दान का विशेष महत्व। साथ ही, ...और पढ़ें

    Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा कब है (Image Source: Freepik)

    Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा कब है (Image Source: Freepik)

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा (Falgun Purnima 2026) का त्योहार बेहद खास होने वाला है। इस दिन न केवल रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा, बल्कि साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) भी लगने जा रहा है। जब पूर्णिमा और ग्रहण एक साथ होते हैं, तो आध्यात्मिक दृष्टि से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च (सोमवार) को शाम 5:55 बजे से होगी और इसका समापन 3 मार्च (मंगलवार) को शाम 5:07 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत 2 मार्च को रखा जाएगा, जबकि उदयातिथि की मान्यता के कारण स्नान और दान 3 मार्च को करना शुभ रहेगा।

    ग्रहण और सूतक काल का समय

    आने वाली 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा है। ज्योतिष शासेत्र के अनुसार, इस दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण सुबह के समय शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले ही 'सूतक काल' शुरू हो जाता है।

    चूंकि, सूतक काल में मंदिरों के पट (दरवाजे) बंद हो जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस बार पूर्णिमा की पूजा और होली के अनुष्ठानों के समय का विशेष ध्यान रखना होगा।

    falgun purnima

    (Image Source: AI-Generated)

    कैसे करें स्नान और दान?

    ग्रहण के दौरान और उसके बाद दान-पुण्य करने का फल अक्षय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण खत्म होने के बाद किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।

    स्नान का नियम: ग्रहण समाप्त होते ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और खुद भी स्नान करें।

    दान की महिमा: फाल्गुन पूर्णिमा पर सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या चांदी का दान करना चंद्रमा को मजबूत बनाता है।

    मंत्र जप: ग्रहण के समय शांत बैठकर 'ॐ नमः शिवाय' या चंद्रमा के बीज मंत्रों का जप करना मानसिक शांति के लिए उत्तम है।

    व्रत और पूजा का विधान

    भले ही ग्रहण का प्रभाव हो, लेकिन श्रद्धा भाव में कमी नहीं आनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर संकल्प लें। हालांकि, सूतक काल में मूर्ति स्पर्श वर्जित है, इसलिए आप मानसिक पूजा (मन में भगवान का ध्यान) कर सकते हैं। ग्रहण खत्म होने के बाद ताजी बनी मिठाइयों या फलों का भोग भगवान को लगाएं और फिर व्रत खोलें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।