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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Maa Laxmi: प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक, मां लक्ष्मी की प्रतिमा के स्वरूप में आए ये खास बदलाव

Published: Mon, 20 Oct 2025 10:12 PM (IST)Updated: Tue, 21 Oct 2025 10:22 PM (IST)

Maa Lakshmi: मां लक्ष्मी को कैसे प्रसन्न करें?

Maa Lakshmi: मां लक्ष्मी को कैसे प्रसन्न करें?

HighLights

  1. दीवाली का त्योहार कार्तिक महीने में मनाया जाता है।

  2. यह पर्व देश और दुनिया में धमधाम से मनाया जाता है।

  3. मां लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन देवी मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन साधक देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। देवी मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। धार्मिक मत है कि मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में अन्न और धन के भंडार भरे रहते हैं। ज्योतिष सुख और सौभाग्य में वृद्धि के लिए शुक्रवार के दिन वैभव लक्ष्मी व्रत रखने की सलाह देते हैं। 

maa laxmi

धार्मिक मत है कि मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आर्थिक विषमता दूर होती है। लेकिन क्या आपको पता है कैसे समय के साथ देवी मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर में परिवर्तन हुआ है? आइए जानते हैं-

मां लक्ष्मी का स्वरूप

  • सनातन शास्त्रों में निहित है देवी मां लक्ष्मी चार भुजाधारी हैं। देवी मां लक्ष्मी कमल पर आसीन हैं। मां के हाथ में कमल है। एक हाथ दान और एक हाथ वर मुद्रा में है। मां लक्ष्मी अपनी कृपा साधक पर बरसती है। मां लक्ष्मी का घर में वास होने से दुख और दरिद्रता दूर हो जाती है। कार्तिक अमावस्या और शुक्रवार का दिन देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
  • गांधार शैली के सिक्कों में देवी मां लक्ष्मी कमल पर खड़ी दिखती हैं। उनके दोनों हाथों में गज हैं। आसान शब्दों में कहें तो गांधार शैली में मां लक्ष्मी को कमल के फूल पर खड़ा दिखाया गया है। वहीं, उनके हस्त में गज हैं। इसके लिए उन्हें गजलक्ष्मी भी कहा जाता है।
  • इसी प्रकार, शक नरेश अज़िलिसेस के काल में भी देवी मां लक्ष्मी कमल पर आसीन हैं। इस मुद्रा में भी मां खड़ी हैं। तत्कालीन समय में अयोध्या और उज्जैन में भी चांदी के सिक्कों में मां लक्ष्मी कमल पर खड़ी दिख रही हैं।
  • तंजौर पेंटिंग में देवी मां गज के साथ किसी आसन (गद्दी) पर विराजमान नजर आती हैं। दक्षिण भारत में देवी मां लक्ष्मी गद्दी या ऊंचे आसन पर विराजमान दिखती हैं।
  • पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के अगले दिन देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसमें देवी मां लक्ष्मी उल्लू के साथ नजर आती हैं। क्रोमोलिथोग्राफ, कलकत्ता आर्ट स्टूडियो ने भी देवी मां लक्ष्मी को उल्लू के साथ दिखाया है।
  • इतिहास के पन्नों को पलटने से पता चलता है कि 19 वीं शताब्दी में राजा रवि वर्मा के ओलियोग्राफी में देवी मां लक्ष्मी एक नदी के बीच में कमल पर विराजमान (खड़ी) हैं। वहीं, देवी मां लक्ष्मी के चारों ओर जीव जंतु हैं और पीछे पहाड़ है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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