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    धनवान को भी अगले जन्म में भिखारी बना देती हैं ये आदतें, गरुड़ पुराण से समझें कर्मों का खेल

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 10:35 AM (IST)

    गरुड़ पुराण बताता है कि व्यक्ति के कर्म ही उसके अगले जन्म का निर्धारण करते हैं। यह ग्रंथ उन पांच कर्मों का उल्लेख करता है जो अगले जन्म में गरीबी का का ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण के अनुसार वो आदतें जो व्यक्ति को निर्धन बनाती हैं। (Picture Credits- AI Image)

    गरुड़ पुराण के अनुसार वो आदतें जो व्यक्ति को निर्धन बनाती हैं। (Picture Credits- AI Image)

    HighLights

    1. दान न करना और केवल धन संचय करना।

    2. माता-पिता, गुरु और बड़ों का अनादर करना।

    3. लोभ में पड़कर दूसरों के साथ अन्याय करना।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण ग्रंथ की अत्यंत महिमा है। सनातन धर्म का पालन करने वाले लोग इस ग्रंथ में लिखी बातों पर आस्था से विश्वास करते हैं। 19000 श्लोक का यह पुराण पूर्वखण्ड और उत्तरखंड दो भागों में विभाजित है। इस ग्रंथ में जीव और जीवन से जुड़ी कथाएं शामिल हैं।

    गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, व्यक्ति के कर्म ही उसका भाग्य और अगला जन्म निर्धारित करते हैं। इस ग्रंथ में यह भी बताया गया है कि, किन कर्मों से व्यक्ति को अगले जन्म में गरीबी मिलती है? आइए जानते हैं इसके बारे में।

    दान न करना लेकिन पैसा जोड़ना

    गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को अपना धन सदुपयोग काम में लगाने के साथ जरूरतमंदों का दान करना चाहिए। जो व्यक्ति सिर्फ पैसा-पैसा करता है लेकिन धर्म-कर्म से जुड़े कार्यों में भागीदारी नहीं निभाता, उसे अगले जन्म में गरीबी भोगनी पड़ती है।

    माता-पिता और गुरुओं का अनादर करना

    गरुड़ पुराण के साथ हिंदू धर्म से जुड़े कई धर्मों में बताया गया है कि, जो व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरु और बड़ों का सम्मान नहीं करता है, उसे अगले जन्म में निर्धन के रूप में काफी कष्ट का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा व्यक्ति को जीवन में हमेशा सफलता मिलती है।

    खबरें और भी

    लालच में पड़कर अधर्म कार्य करना

    गरुड़ पुराण के अनुसार जो मनुष्य लोभी स्वभाव रखकर सिर्फ अपना ही फायदा देखता है और लोगों के साथ अन्याय करता है, उसे अगले जन्म में काफी कष्टों का सामना करना पड़ता है। भगवद्गीता के 16वें अध्याय में भगवान कृष्ण कहते हैं कि,

    त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं: काम, क्रोध, लोभ

    अर्थात्- काम, गुस्सा और लोभ नर्क के तीन द्वार ही वे मार्ग हैं, जो मनुष्य के पतन का कारण बनते हैं।

    सच की जगह झूठ का सहारा लेना

    सनातन परंपरा में झूठ बोलना सबसे बड़ा पाप माना गया है। आज के समय में अधिकतर लोग इस बात को नजर अंदाज कर देते हैं, लेकिन हिंदू शास्त्रों में इसे पाप की श्रेणी में रखा गया है।

    गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सत्य और सदाचार की बजाय झूठ और छल-कपट करता है, उसे अगले जन्म में निर्धनता का सामना करना पड़ता है।

    गरीब औ जरूरतमंद लोगों का अपमान करना

    गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति असहाय, गरीब और दुखी लोगों को सताता है, उनका हक मारता है या उनके प्रति अन्याय की भावना रखता है, वह पाप का भागीदारी बनता है। मृत्यु के पश्चात उसे काफी कष्ट और अगले जन्म में दुख, पीड़ा और दरिद्रता का सामना करना पड़ता है।

    गरुड़ पुराण में साफतौर पर लिखा है कि, मनुष्य अपने जीवन काल में जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। जो व्यक्ति सत्य कर्मों का पालन करता है, भले ही उसे सांसारिक जीवन में कष्ट सता सकता है, लेकिन कमजोर नहीं करता है।

    जो लोग वर्तमान समय में अधर्म, लोभ, अन्याय, दान या सेवा नहीं करते हैं, भले ही उनके पास यश, नाम और पैसा हो, लेकिन उन्हें कभी भी आंतरिक सुख की प्राप्ति नहीं होती है। शास्त्र कहते हैं कि, कलियुग में सच्ची खुशी का आधार पैसा, भौतिक सुख-सुविधा या नाम से बढ़कर कुछ है, तो वो है मन की शांति।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।