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    Geeta Jayanti 2025: गीता जयंती पर रखें जरूरी बातों का ध्यान, सभी चिंताएं होंगी दूर

    Updated: Wed, 26 Nov 2025 12:19 PM (GMT+05:30)

    इस वर्ष 1 दिसंबर को गीता जयंती (Geeta Jayanti 2025)  मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में गीता जयंती का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि इस दिन पर भगवान श्रीकृष ...और पढ़ें

    Geeta Jayanti 2025 (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    Geeta Jayanti 2025 (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    HighLights

    1. इस साल 1 दिसंबर को मनाई जाएगी गीता जयंती।

    2. श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ से मिलता है पुण्य फल।

    3. भगवान श्रीकृष्ण की कृपा के लिए जरूर करें ये काम।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें लिखा हर शब्द स्वयं श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकलता है, इसलिए इस ग्रंथ का इतना महत्व है। हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है।

    इस दिन ही स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस दिन पर किन कार्यों (Geeta Jayanti Do's And Don'ts) को करने से लाभ मिल सकता है।

    जरूर करें ये काम (Geeta Jayanti 2025)

    • गीता जयंती के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ जरूर करें। इससे व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है
    • शुभ फलों के लिए आप इस दिन पर मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रख सकते हैं।
    • इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा जरूर करनी चाहिए, साथ ही उनके मंत्रों का भी जप करें।
    • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
    • गीता जयंती के दिन सिर्फ सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
    • गीता जयंती पर दान-पुण्य करना शुभ होता है, ऐसे में गरीबों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।
    • गायों की सेवा करें और उन्हें हरी घास व रोटी खिलाएं।
    • इस दिन गीता के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
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    भूलकर से भी न करें ये काम

    • गीता जयंती के दिन तामसिक भोजन काे सेवन से बचना चाहिए। साथ ही मांस-मदिरा आदि से भी दूरी बनानी चाहिए।
    • इस दिन मन में किसी भी तरह के नकारात्मक विचार न लगाएं।
    • बिना स्नान किए या अशांत मन के साथ गीता का पाठ शुरू न करें।
    • यदि आप गीता का पाठ करते हैं, तो पूरा अध्याय पढ़कर ही उठें।
    • एकादशी होने के कारण इस दिन पर तुलसी में जल अर्पित न करें और न ही तुलसी के पत्ते उतारें।
    • बिना स्नान किए या फिर गंदे हाथों से श्रीमद्भगवद्गीता को न छूएं और न ही इसका पाठ करें 
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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।