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    सिर्फ आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, जीवन के हर 'मेंटॉर' को सम्मान देने का दिन गुरु पूर्णिमा 2026 में कब?

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 12:17 PM (GMT+05:30)

    इस साल गुरु पूर्णिमा कब और किस दिन मनाई जाएगी? इसके अलावा क्यों यहब पूर्णिमा अन्य सभी पूर्णिमा से खास है जानिए इसका आध्यात्मिक महत्व? ...और पढ़ें

    गुरु पूर्णिमा 2026 में कब है? (AI-Generated Image)

    गुरु पूर्णिमा 2026 में कब है? (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का दिन बेहद खास माना जाता है। यह दिन मुख्य रूप से गुरुओं के सम्मान के लिए समर्पित है।

    आज के दौर में गुरु केवल आध्यात्मिक गुरु तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षक, मार्गदर्शक, माता-पिता या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो हमारे सही रास्ता दिखाए, वह भी हमारे गुरु के ही समान माना जाता है। ऐसे में जानते हैं इस साल गुरु पूर्णिमा कब है?

    गुरु पूर्णिमा तिथि और समय

    गुरु पूर्णिमा तिथि की शुरुआत- 28 जुलाई 2026 शाम 6 बजकर 18 मिनट पर

    गुरु पूर्णिमा तिथि की समाप्ति- 29 जुलाई 2026 रात 8 बजकर 5 मिनट पर

    गुरु पूर्णिमा 2026

    गुरु पूर्णिमा का महत्व

    हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक नजरिए से बेहद खास माना जाता है। इस दिन लोग भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करते हैं।

    एक वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा की तिथि आती है, लेकिन गुरु पूर्णिमा सबसे खास मानी जाती है क्योंकि यह दिन गुरुओं के सम्मान का होता है।

    गुरु पूर्णिमा कैसे मनाएं?

    गुरु पूर्णिमा के मौके पर सुबह जल्दी उठने के बाद साफ-सफाई करें। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और माता पिता के साथ बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें। इसके अलावा सूर्य भगवान को जल अर्पित करना चाहिए।

    गुरु पूर्णिमा 2026 मंत्र

    गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:।

    गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।

    इसका अर्थ- गुरु ही ब्रह्मा हैं और गुरु ही विष्णु हैं। गुरु देव ही शिव हैं तथा गुरुदेव ही साक्षात साकार स्वरूप आदिब्रह्म हैं। मैं उन्हीं गुरुदेव को नमस्कार करता हूं।

    गुरु पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

    • गुरु पूर्णिमा के मौके पर कभी गुस्सा, ईर्ष्या या किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
    • इस दिन सात्विकता, सत्य और सकारात्मक भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए।
    • मांस, मटन-चिकन या मदिरा जैसी अशुद्ध चीजों का सेवन करने से बचें। किसी भी स्त्री के लिए मन में गलत विचार न आने दें।
    • गुरु के प्रति मन में द्वेष, गुस्सा या अपशब्द का प्रयोग करने से बचें।

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